देहरादून, जेएनएन। प्रदेश में सभी बिजली अधिकारियों और कर्मचारियों के घर के बाहर बिजली मीटर लगे होंगे। ऊर्जा सचिव आइएएस राधिका झा की देखरेख में उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन (यूपीसीएल), पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन ऑफ उत्तराखंड (पिटकुल) और उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूवीजेएनएल) में आयोजित बोर्ड बैठक में यह निर्णय लिया गया है। इसके अलावा विभागीय कार्मिकों से वसूले जाने वाले चार्जेस पर भी अंतिम निर्णय लिया गया। 

विद्युत टैरिफ पर लंबे समय से विद्युत अधिकारियों-कर्मचारियों और तीनों निगमों के बीच विवाद चल रहा था। इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की गई थी। याचिकाकर्ता ने कहा था कि प्रदेश में कई अधिकारियों के घर पर बिजली के मीटर तक नहीं लगे हैं। जो लगे भी हैं, वो खराब हैं। विभाग के रिटायर्ड कर्मचारियों और उनके आश्रितों को भी मुफ्त बिजली दी जा रही है। इसके अलावा उत्तराखंड ऊर्जा प्रदेश घोषित है, लेकिन यहां बिजली हिमाचल से महंगी है। जबकि हिमाचल में बिजली का उत्पादन तक नहीं होता। याचिकाकर्ता का यह भी कहना था कि घरों में लगे मीटरों का किराया ऊर्जा निगम कब का वसूल चुका है। इस मामले में कोर्ट ने यूपीसीएल के एमडी से जवाब मांगा था। 

बोर्ड बैठक में विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को छह से नौ हजार यूनिट बिजली प्रति वर्ष देने का निर्णय लिया गया। कर्मचारियों को छह हजार जबकि अधिकारियों को नौ हजार यूनिट के आसपास बिजली मिल सकती है। इस पर अंतिम निर्णय विद्युत नियामक आयोग करेगा। इसके अलावा हर साल आम उपभोक्ताओं की तरह बिजली के रेट भी बढ़ाए जाएंगे। अब तक विभाग के कार्मिकों को असीमित बिजली दी जाती थी। 

सीसीटीवी में दिखेगी व्यासी प्रोजेक्ट की प्रगति 

बोर्ड बैठक में व्यासी प्रोजेक्ट पर चल रहे कार्य को भी एक्सटेंशन दिया गया है। इसके अलावा प्रोजेक्ट की देखरेख के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्णय लिया गया है। इससे कहीं भी बैठकर प्रोजेक्ट के कामकाज को देखा जा सकता है। बैठक में प्रोजेक्ट की प्रगति की समीक्षा भी की गई। 

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जीआइएस सब स्टेशन बनाने को भी मिली अनुमति 

बोर्ड बैठक में पिटकुल को सेलाकुई और द्वाराहाट में गैस इंसुलेटिड सब स्टेशन (जीआइएस) बनाने की अनुमति मिल गई है। यह प्रोजेक्ट लंबे समय से अधर में थे, जिसे बुधवार को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की बैठक में अनुमति दी गई है। 

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Posted By: Raksha Panthari

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