बदली परिस्थितियों में साइबर क्राइम आज देश-दुनिया में एक बड़ी चुनौती के रूप में उभरकर सामने आया है। उत्तराखंड भी इससे अछूता नहीं है। साइबर ठगों के झांसे में आकर लोग जीवनभर की जमा पूंजी गंवा बैठते हैं। और तो और पढ़े-लिखे लोग भी इन ठगों के झांसे में आ जाते हैं। ऐसे में आमजन का जागरूक होना जरूरी है। इस कड़ी में उत्तराखंड पुलिस के स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने जनजागरूकता के लिए पहल शुरू की है। साथ ही साइबर अपराधियों पर नकेल कसने की दिशा में नई रणनीति अख्तियार की है।

10 माह में 80 लाख के मोबाइल बरामद
साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन देहरादून ने पिछले साल नवंबर में मोबाइल सेल का गठन किया। एसटीएफ की वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रिद्धिम अग्रवाल के अनुसार 10 माह की अवधि में इस सेल ने 630 मोबाइल बरामद किए, जिनकी कीमत करीब 80 लाख रुपये है। वह बताती हैं कि अब मोबाइल चोरी करने वाले गिरोहों की धरपकड़ के लिए रणनीति बनाई गई है। इस पर कार्य भी प्रारंभ कर दिया गया है।

जागरूकता ही बचाव का हथियार
एसटीएफ की एसएसपी अग्रवाल कहती हैं कि साइबर क्राइम से बचा जा सकता है, बशर्ते लोग जागरूक हों। बैंक कभी भी फोन पर एटीएम, बैंक अकाउंट आदि के बारे में कभी कोई जानकारी नहीं लेते। इस बात का भान हो तो कोई साइबर ठगों का शिकार नहीं बनेगा। साफ है कि साइबर अपराधों से बचने का एकमात्र कारगर हथियार जागरूकता ही है।

दून में लगेंगी जागरूकता कार्यशालाएं
बढ़ते साइबर अपराधों से दून भी अछूता नहीं है। इसे देखते हुए आमजन को जागरूक करने के लिए एसटीएफ ने शहर की आवासीय कॉलोनियों और शिक्षण संस्थाओं में जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित करेगा, जिसमें एसटीएफ के विशेषज्ञ लोगों और विद्यार्थियों को साइबर अपराध और इनसे बचाव के बारे में जानकारी देंगे। इसकी शुरुआत शास्त्रीनगर कॉलोनी से की जाएगी।

सोशल मीडिया की मॉनीटरिंग
वह कहती हैं कि सोशल मीडिया के उपयोग में भी सावधानी बरती जानी चाहिए। लिहाजा, सोशल मीडिया पर अनजान लोगों की रिक्वेस्ट कतई स्वीकार न करें। वजह ये कि अनजान शख्स आपको बिजनेस, लॉटरी आदि का झांसा दे सकता है। इस सबके मद्देनजर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन सोशल मीडिया की मॉनीटरिंग कर रहा है।

By Krishan Kumar