कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉंसिब्लिटी का मतलब सिर्फ बजट मुहैया कराना ही नहीं है। यह देखा जाना भी जरूरी है कि जो बजट जिस प्रयोजन के लिए दिया गया है, उसका सदुपयोग हुआ भी है या नहीं। दून की बेहतरी के लिए पिछले महज तीन साल के भीतर 3.27 करोड़ रुपये खर्च करने वाली देश की महारत्न कंपनी ओएनजीसी (ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन) इसी दिशा में आगे बढ़ रही है। सीएसआर फंड में दी गई राशि का मकसद भी सफल हो सके। यह कहना है ओएनजीसी की समूह कार्यकारी निदेशक, प्रधान निगमित प्रशासन प्रीता पंत व्यास का।

यह पहली बार हुआ है, जब कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉंसिब्लिटी के साथ इंडीविजुअल सोशल रिस्पॉंसिब्लिटी की बात भी की जा रही है। इसका प्रमुख श्रेय ओएनजीसी को ही जाता है। तय किया गया है कि इसके लिए जिलाधिकारियों को जिम्मेदारी दी जाएगी। ताकि उपलब्ध कराए गए बजट का सदुपयोग सौ फीसद किया जा सके। ऐतिहासिक घंटाघर से दून की पहचान है, उसकी बेहतरी के लिए ओएनजीसी अब तक 88 लाख रुपये से अधिक की राशि खर्च कर चुका है। घंटाघर को दून के केंद्र स्थल भी माना जाता है। जबकि लंबे समय से इसकी हालत खराब हो रही थी। ढांचागत विकास की दिशा में ओएनजीसी आगे आया और घंटाघर की बेहतरी का बीड़ा उठाया। जिसका परिणाम यह हुआ कि घंटाघर आज नए रूप में नजर आने लगा है।

ओएनजीसी ने दून की स्वच्छता का भी बीड़ा उठाया। नगर निगम के आग्रह पर सार्वजनिक शौचालय बनाने के लिए ओएनजीसी अब तक 93.91 लाख रुपये मुहैया करा चुका है। इस राशि से 12 सार्वजनिक शौचालय के निर्माण को बल मिल सका। यह मदद भी ऐसे समय पर मिली, जब दून स्वच्छ सर्वेक्षण में लगातार खराब प्रदर्शन कर रहा है। सार्वजनिक शौचालयों को स्वच्छ सर्वेक्षण में बड़े कंपोनेंट के रूप में शामिल किया गया था।

जबकि इस दिशा में कमजोर प्रगति के चलते दून को निचले पायदान की रैंकिंग के रूप में चुकाना पड़ा। स्वच्छता की दिशा में ओएनजीसी यही मदद गढ़ी कैंट बोर्ड देहरादून को भी कर चुका है। कैंट बोर्ड में सार्वजनिक शौचालयों की बेहतरी के लिए महारत्न कंपनी 9.73 लाख रुपये की राशि उपलब्ध करा चुकी है। दून के रामकृष्ण मिशन आश्रम में भी ओएनजीसी के सहयोग से शौचालय का निर्माण संभव हो सका। यहां पढऩे वाले बच्चे इस सुविधा का लाभ उठा रहे हैं।

ऐतिहासिक टपकेश्वर मंदिर की सुधरी व्यवस्था
ओएनजीसी ने दून के ऐतिहासिक टपकेश्वर महादेव मंदिर परिसर में सार्वजनिक शौचालय निर्माण के लिए 19.43 लाख रुपये का सहयोग सीएसआर फंड से किया। ताकि देश और दुनियाभर से आने वाले श्रद्धालुओं के मन में दून की बेहतर छवि बन सके।

शिक्षा व्यवस्था में भी खासा योगदान
राजकीय जूनियर हाईस्कूल, शंकरपुर (सहसपुर) के भवन की मरम्मत व यहां शौचालय, कंप्यूटर व फर्नीचर व्यवस्था के लिए ओएनजीसी 9.63 लाख रुपये मुहैया करा चुका है। दूसरी तरफ गरीब लोगों के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहे आसरा ट्रस्ट को ओएनजीसी के सीएसआर फंड से एक बस की व्यवस्था कराई जा चुकी है। 16.64 लाख रुपये से जिस बस का इंतजाम कराया गया है, वह दून के ऐसे इलाकों में भ्रमण करती है, जहां के बच्चे स्कूल का मुहं नहीं देख पाते। इस बस में शिक्षक समेत तमाम तरह की शिक्षण सामग्री उपलब्ध रहती है। साथ ही महात्मा खुशी राम पब्लिक लाइब्रेरी एंड रीडिंग रूम सोसाइटी में सुधारात्मक कार्यों के लिए भी ओएनजीसी अपने फंड से 9.79 लाख रुपये प्रदान कर चुका है।

पेयजल व्यवस्था भी कराई सुदृढ़
प्रेमनगर व गढ़ी कैंट क्षेत्र में पेयजल इंतजाम बेहतर बनाने के लिए ओएनजीसी ने दो ट्यूबवेल के निर्माण को बजट मुहैया कराया है। इसके अलावा राज्य में आर्मी वेलफेयर व शिक्षण संस्थानों में तमाम तरह के संसाधन मुहैया कराए गए हैं।

सीएसआर में बढ़ रहे कदम
ओएनजीसी ने वर्ष 2015-16 में सीएसआर फंड के तहत कुल 421 करोड़ रुपये खर्च किए थे। जबकि वर्ष 2016-17 में यह राशि बढ़कर 526 करोड़ रुपये जा पहुंची। इसी तरह वर्ष 2017-18 व 18-19 में भी इससे अधिक राशि का प्रावधान किया गया।

By Krishan Kumar