देहरादून, जेएनएन। पंचायती राज विभाग में सेवा नियमावली एवं ढांचा परिवर्तन का मामला फिर गरमा गया है। सरकार की ओर से पंचायती राज विभाग के कई पद खत्म करने की सूचना से कर्मचारियों में रोष है। इसे लेकर गुरुवार को उत्तराखंड जिला पंचायत कर्मचारी, अधिकारी महासंघ के प्रांतीय अध्यक्ष रमेश चंद्र नेगी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल पंचायती राज सचिव हरीशचंद सेमवाल से मिला और ऐसा न किए जाने की मांग की।

रमेश चंद्र नेगी ने कहा कि महासंघ ढांचा सुधार एवं सेवा नियमावली की विसंगतियां दूर करने की मांग कर रहा है, लेकिन जरूरी पद खत्म करने की शर्त पर नहीं। विश्वसनीय सूत्रों से पता चला है कि सरकार आगामी कैबिनेट बैठक में कई अनिवार्य पद खत्म करने की तैयारी कर रही है। राजस्व निरीक्षक के 128 पदों को कम कर 28 व कर समाहर्ता के 95 पदों को घटाकर 80 किया जा रहा है।

जिला पंचायत अपने संसाधनों से आय जुटाकर वेतन, भत्ते आदि देता है। जिसके लिए राजस्व निरीक्षक, कर समाहर्ता की आवश्यकता होती है। मिनिस्टीरियल संवर्ग के वरिष्ठ सहायकों के 76 पदों को 49 किया जा रहा है। आशुलिपिक संवर्ग पदनाम परिवर्तित कर व्यैक्तिक सहायकों के 16 पदों को कम कर 13 करने की तैयारी है। कनिष्ठ सहायक के दो पदों में से एक खत्म किया जा रहा है। पदों में कटौती करने से विभाग के कार्य प्रभावित होंगे, साथ ही पदोन्नति के रास्ते भी बंद हो जाएंगे। महासंघ ने पद खत्म करने के प्रस्ताव को बदलने एवं पद खत्म करने की जगह भर्ती करने की मांग की। नेगी ने बताया कि सचिव पंचायती राज ने महासंघ की मांगों को सरकार के समक्ष उठाने का आश्वासन दिया है।

उत्तर प्रदेश कैडर के अधिकारियों का मुद्दा गरमाया

लेखा परीक्षा, स्वास्थ्य, लोक निर्माण विभाग समेत कई विभागों में तैनात उत्तर प्रदेश कैडर के अधिकारियों का उत्तराखंड से मोह नहीं छूट रहा है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि उप्र कैडर के अधिकारियों की वजह से उत्तराखंड कैडर के अधिकारियों की ज्येष्ठता प्रभावित हो रही है। हालांकि, राज्य पुनर्गठन विभाग का कहना है कि सूबे में कुछ ही विभागों में उप्र कैडर के अधिकारी बचे हैं। वर्ष 2000 में उत्तराखंड राज्य बनने के बाद आइएएस, आइपीएस, पीसीएस संवर्ग के अधिकारियों को उत्तराखंड कैडर आवंटित किया गया।

जिन विभागों में उत्तराखंड कैडर के अधिकारियों की संख्या कम पड़ रही थी, वहां उत्तर प्रदेश कैडर के अधिकारियों को तब तक के लिए रोक लिया गया था, जब तक राज्य में उनके सापेक्ष पदों पर तैनाती न हो जाए। इस तरह की व्यवस्था बनने के करीब बीस वर्ष बाद भी स्वास्थ्य विभाग में कुछ चिकित्सक, पुलिस विभाग में कुछ अधिकारी से लेकर लोक निर्माण विभाग में अभियंताओं के कई पदों पर उत्तर प्रदेश कैडर के अधिकारी जमे हुए हैं। लेखा परीक्षा विभाग में भी उप्र कैडर के दो सहायक लेखा परीक्षा अधिकारी और एक लेखा परीक्षा अधिकारी अभी कार्यरत हैं। 

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