जागरण संवाददाता, देहरादून। संस्कार, समृद्धि व सौभाग्य के पर्व वट सावित्री व्रत पर सुहागिनों ने सती सावित्री का पूजन और वट वृक्ष की परिक्रमा कर पति की लंबी आयु की कामना की। इसके उपरांत महिलाएं ‘दैनिक जागरण’ की मुहिम ‘वट से बांधे सांसों की डोर’ का हिस्सा भी बनीं। जिसके तहत उन्होंने वट के पौधे रोपे और उनकी सुरक्षा का संकल्प लिया।

ज्येष्ठ मास की अमावस्या के दिन पड़ने वाले इस पर्व में सुहागिन पूजा की थाली सजाकर वट की बारह बार परिक्रमा करने के बाद फल-फूल चढ़ाकर सुख समृद्धि और पति की लंबी आयु की कामना करती हैं। इसी क्रम में गुरुवार को शहर में वट सावित्री का पर्व महिलाओं ने श्रद्धाभाव से मनाया। महिलाओं ने सुबह व्रत का संकल्प लेकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए वट की टहनी को तोड़ने के बजाय पूजास्थल पर वट का चित्र बनाकर पूजा की। इसके बाद पार्कों व खाली स्थानों पर वट के पौधे व आक्सीजन प्लांट लगाए और उनकी विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इसके अलावा झंडा बाजार, पथरीबाग, राजपुर, लक्ष्मण चौक स्थित अभय मठ मंदिर में भी वट की पूजा की गई।

पौधे रोपकर महिलाएं बोलीं- अब सुरक्षा की बारी: वट सावित्री पर अधिक आक्सीजन देने वाले पौधों का रोपण करने के बाद महिलाओं ने कहा कि अब इनकी सुरक्षा करने की जिम्मेदारी है। जीएमएस रोड निवासी संध्या जोशी ने कहा कि उन्होंने मिलन विहार स्थित पार्क में पौधा रोपा और अन्य महिलाओं को भी इसके लिए जागरूक किया। डालनवाला निवासी महक और मनदीप ने बताया कि पूजा के बाद उन्होंने वट के पौधे लगाए। उत्तरांचल महिला एसोसिएशन की अध्यक्ष साधना शर्मा ने कहा कि पर्व संस्कृति को बचाने के अलावा हमें पर्यावरण से भी जोड़ते हैं। इसलिए एक पर्व पर एक पौधा जरूर लगाना चाहिए।

अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए कूर्माचल परिषद से जुड़ी महिलाओं ने भी वट सावित्री का पर्व मनाया। कोरोना संक्रमण के चलते उन्होंने एक जगह एकत्र होने के बजाए अपने-अपने घरों पर पूजा अर्चना की। कूर्माचल परिषद की सांस्कृतिक सचिव बबिता साह लोहानी ने बताया कि यह पर्व सामूहिक रूप से हर वर्ष मनाया जाता है जिसमें महिलाएं वृक्ष के चारों ओर पूजा करते हुए जलाभिषेक, दीप दान, रोली, अक्षत, चंदन, फूल,भीगे चने, फल चड़ाकर, वट वृक्ष के चारों तरफ धागा बांधकर पूजा, अर्चना करती हैं। परिषद का हमेशा प्रयास रहा है कि अपने संस्कृति एवं तीज त्योहार हमेशा मनाते रहें। सभी महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा, आभूषणों एवं पकवानों के साथ इस त्योहार को मनाती हैं।

शनि जन्मदिवस पर की पूजा

शनि जन्मदिवस पर भक्तों ने मंदिर व घरों में शनिदेव की पूजा कर कष्ट निवारण व वैश्विक महामारी के जल्द खात्मे की कामना की। नवग्रह शनि मंदिर गढ़ी कैंट, कारगी, काली मंदिर देहराखास आदि मन्दिर में दीये जलाकर पूजा की। वहीं जरूरतमंदों को दान किया गया।

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