जागरण संवाददाता, ऋषिकेश: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश पर बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के चिह्नीकरण का कार्य जनवरी 2020 तक पूर्ण हो जाएगा। उत्तरकाशी और हरिद्वार जनपद में यह कार्य पूर्ण हो चुका है। देहरादून के ऋषिकेश और आसपास क्षेत्रों में यह कार्य अंतिम चरण में है।

पिछले 25 वर्षो में बाढ़ की हद सिचाई विभाग चिह्नित कर रहा है। इसके बाद अगले 50 वर्षो तक इस तरह अधिसूचित क्षेत्र में निर्माण कार्य पर पूरी तरह से रोक लग जाएगी।

राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने गंगा और उसकी सहायक नदियों के 100 मीटर परिधि तक किसी भी तरह के निर्माण पर रोक लगायी थी। एनजीटी का यह अंतरिम आदेश था। एनजीटी ने वर्ष 2015 में राज्य सरकार को गंगा व अन्य नदियों के बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों को चिह्नित करने के आदेश जारी किए थे। इस कार्य में पिछले 25 वर्षो में बाढ़ की हद क्या रही है, इस बात का विशेष ध्यान रखने को कहा गया है। फ्लड जोन चिह्नित करने के पीछे शासन की मंशा इस क्षेत्र में आने वाले अगले 50 वर्षों में विकास कार्यों का पैमाना तैयार करना है। इसके साथ निर्माण कार्यों को अधिसूचित करना भी है। उपजिलाधिकारी प्रेमलाल ने बताया कि ऋषिकेश और आसपास क्षेत्र में सिचाई विभाग की ओर से यह कार्य शुरू कर दिया गया है। इसके पूर्ण होने के बाद शासन को रिपोर्ट भेज दी जाएगी। सिचाई विभाग के सहायक अभियंता अनुभव नौटियाल ने बताया कि ऋषिकेश क्षेत्र में जनवरी तक यह कार्य पूर्ण हो जाएगा। अगले वर्ष राज्य सरकार इस पर अधिसूचना जारी करेगी। उन्होंने बताया कि नदी तट से कितने क्षेत्र तक पिछले 25 वर्षो में बाढ़ ने असर डाला है इस बात की रिपोर्ट तैयार की जा रही है। सेटेलाइट से फोटो हासिल करने के साथ भौतिक सत्यापन भी इसमें हो रहा है। इस कार्य के पीछे यही मंशा है कि नदी तट पर बसने वाले लोग सचेत रहे।

Posted By: Jagran

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