जागरण संवाददाता, देहरादून : उत्तराखंड के तीन सरकारी आयुर्वेदिक कालेजों की मान्यता को लेकर मुश्किल खड़ी हो गई है। इन कालेजों में फैकल्टी व अन्य सुविधाएं मानकों के अनुरूप नहीं हैं। भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग (एनसीआइएसएम) ने इन खामियों को दूर करने के लिए 31 दिसंबर तक का समय दिया है। जिससे विवि व कालेजों में हड़कंप मचा है। एनसीआइएसएम ने इस संदर्भ में आयुष विभाग को पत्र भेजा है।

जिसमें आयुर्वेद विवि के हर्रावाला स्थित मुख्य परिसर और हरिद्वार स्थित ऋषिकुल व गुरुकल परिसर में टीचिंग एवं नान टीचिंग स्टाफ की कमी सहित अन्य संस्थागत खामिया बताई गई हैं। जिसमें कहा गया है कि 31 दिसंबर तक खामिया दूर न होने पर आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए कालेजों को अनुमति प्रदान नहीं की जाएगी। जिसके बाद शासन ने विवि को इस बारे में निर्देश जारी किए हैं। इसके साथ ही भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग (एनसीआइएसएम) में शपथ पत्र दिया गया है कि खामिया समय से दूर कर ली जाएंगी। इधर, कालेजों में स्टाफ की कमी दूर करने को लेकर विवि प्रबंधन ने प्रयास तेज कर दिए है। इसके साथ ही अस्पताल में भी सुविधाओं को विस्तार दिया जा रहा है।

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उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय, हर्रावाला के कुलपति प्रो. सुनील जोशी का कहना है कि विवि नवीन शोध एवं शिक्षण के क्षेत्र में बेहतर कार्य कर रहा है। कुछ खामिया हैं। लेकिन, ऐसी नहीं कि जिन्हें दूर न किया जा सके। उन्‍होंने कहा कि निश्चित ही इन्हें समय से दूर कर लिया जाएगा। इसके अलावा उन्होंने उम्मीद जताई कि विवि को मान्यता मिल जाएगी और इसमें किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं होगी। इसके लिए प्रयास जारी हैं।

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