देहरादून, [जेएनएन]: प्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेजों को अब सरकार का भी खौफ नहीं रह गया है। उन्हें सरकार द्वारा तय फीस पर छात्रों को दाखिलान देने तक से गुरेज है। स्थिति यह कि प्रवेश तक के लिए छात्रों को कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। यही नहीं नीट पीजी की प्रथम राउंड की काउंसिलिंग के तहत कई छात्र सीट आवंटित होने के बावजूद दाखिले से वंचित रह गए हैं। 

नीट-पीजी काउंसिलिंग का प्रथम चरण गुरुवार को समाप्त हो गया। एचएनबी चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय ने प्रथम चरण में एमडी-एमएस की 163 सीट आवंटित की थीं। जिनमें 88 छात्रों ने ही फीस जमा की। हिमालयन इंस्टीट्यूट व एसजीआरआर मेडिकल कॉलेज में 32-32 सीट आवंटित की गई थीं। लेकिन दाखिले के लिए छात्रों को अंतिम समय तक इंतजार करना पड़ा। 

फीस पर मेडिकल कॉलेज के अडियल रवैये के कारण न केवल छात्र हाईकोर्ट गए, बल्कि प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति तक को भी कॉलेज को नोटिस देना पड़ा। हाईकोर्ट के छात्रों को सशर्त दाखिला देने के आदेश दिए। लेकिन इस पर भी कालेजों का तर्क यह कि सशर्त दाखिला भी उसी का होगा जो कोर्ट गया। बहरहाल गुरुवार को प्रथम चरण के  दाखिले का अंतिम दिन था और इसी खींचतान में कई छात्रों को अब भी प्रवेश नहीं मिल पाया है।वह अब हाईकोर्ट जाने की तैयारी में हैं। 

यूं उलझा मामला 

फीस की इस उलझन में एचएनबी चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय तक को एक दिन सीट आवंटन टालना पड़ा था। बाद में पुरानी ही फीस पर दाखिले का निर्णय लिया गया। विवि का कहना था कि क्योंकि अभी तक हाईकोर्ट ने इस मामले में कोई निर्णय नहीं दिया है, इसलिए फैसले की प्रत्याशा में गत वर्ष ली गई फीस पर ही दाखिले होंगे। जबकि निजी मेडिकल कॉलेजों का कहना था कि यह कॉलेज विवि के तहत संचालित होते हैं। जिन्हें शुल्क निर्धारण का अधिकार है। हाईकोर्ट ने 11 जनवरी 2018 को शुल्क संबंधी जो अंतरिम आदेश दिया है, उसी के अनुपालन में फीस ली जाएगी। इसी को लेकर ऊहापोह की स्थिति बनी है। 

कॉलेजों ने कई गुना बढ़ा दी है फीस 

राज्य में निजी मेडिकल कॉलेजों में एमडी-एमएस स्टेट कोटा के तहत क्लीनिकल में 738835, जबकि नॉन क्लीनिकल में 506697 रुपये सालाना फीस निर्धारित है। उत्तराखंड में वर्ष 2006 में प्रवेश एवं शुल्क निर्धारण समिति का गठन हुआ था, जिसके तहत शुल्क तय किया गया है। मामला हाईकोर्ट में लंबित है, जिस पर अभी फैसला नहीं आया है। इस बीच राज्य कैबिनेट ने निजी मेडिकल कॉलेजों को शुल्क निर्धारण का अधिकार दे दिया। जिसके बाद फीस 30 लाख सालाना तक बढ़ा दी गई है। 

स्वामी राम हिमालय यूनिवर्सिटी के कुपति डॉ. विजय धस्माना ने बताया कि नीट पीजी के तहत 32 छात्रों को दाखिला दिया है। हाईकोर्ट के आदेश की प्रत्याशा में अभी पुरानी फीस पर ही प्रवेश हुए हैं। कोर्ट जो भी निर्णय देगा, उसके अनुसार ही आगे कार्रवाई की जाएगी। 

वहीं एसजीआरआर मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी भूपेंद्र रतूड़ी ने बताया कि हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश के तहत यह व्यवस्था दी है कि विवि शुल्क निर्धारण कर सकते हैं। पीजी की फीस निर्धारण संबंधी समस्त विवरण कोर्ट में दिया हुआ है। फिलहाल इस पर अंतिम निर्णय आना बाकी है। 

निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. आशुतोष सयाना ने बताया कि निजी और डीम्ड विश्वविद्यालय उत्तराखंड अनानुदानित निजी व्यवसायिक शिक्षण संस्थान (प्रवेश एवं शुल्क निर्धारण विनियम) अधिनियम- 2006 की परिधि में आते हैं। इसे हाईकोर्ट ने खारिज नहीं किया है।अधिनियम की धारा-5 (2) में स्पष्ट है कि संस्थान निर्धारित से ज्यादा शुल्क नहीं ले सकता है। प्रवेश एवं शुल्क निर्धारण समिति द्वारा निर्धारित शुल्क को हाईकोर्ट ने खारिज नहीं किया है। न उक्त शुल्क के पुनर्निधारण के लिये कोई आवेदन समिति में किया गया है। 

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Posted By: Raksha Panthari

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