जागरण संवाददाता, देहरादून: पूर्व रक्षा मंत्री व गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्र्रीकर बहुत ही सरल व्यक्ति थे। उनकी बेदाग छवि और सहज व मृदुभाषी व्यक्तित्व का दून भी कायल रहा है। पर्रीकर एकाध नहीं कई अवसर पर दून आए और उनके यूं एकाएक चले जाने से शहर के लोग शोकाकुल हैं।

वीरभूमि उत्तराखंड के सबसे पहले स्टेट वॉर मेमोरियल (शौर्य स्थल) का शिलान्यास पर्रीकर ने ही किया था। वह तब रक्षा मंत्री थे। 30 अप्रैल 2016 को आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि शौर्य स्थल का निर्माण पूरा होने के बाद उद्घाटन के लिए भी आएंगे। पर अफसोस उनकी यह इच्छा अधूरी रह गई। अभी कुछ दिन पूर्व ही उन्हें युद्ध स्मारक का संरक्षक बनाया गया था। इसी दिन वह एफआरआइ में इंदिरा गाधी राष्ट्रीय वन अकादमी (आइजीएनएफए) के दीक्षांत समारोह में भी बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए थे। नवंबर 2015 में पर्र्रीकर राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज (आरआइएमसी) के 178वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि थे। जहां उन्होंने निर्धारित समय से पहले पहुंचकर सबको चौंका दिया था। उन्होंने कहा था कि कॉलेज में सीटों की संख्या काफी कम है। यह संख्या दोगुनी होनी चाहिए। दिसंबर 2016 में वह प्रदेश की कांग्रेस सरकार के खिलाफ भाजपा द्वारा आयोजित परिवर्तन यात्रा के समापन पर दून आए थे। इस कार्यक्रम में भी उनका वही जोश दिखा जिसके लिए वह जाने जाते थे। तब उन्होंने सैन्य पराक्रम पर बात करते कहा था कि सीमा पर हमारे जवान गरज रहे हैं, इसलिए देश में शाति है। शौर्य स्थल के रूप में उत्तराखंड की स्मृति में रहेंगे पर्रीकर

शौर्य स्थल के अध्यक्ष पूर्व राज्य सभा सदस्य तरुण विजय ने कहा कि मनोहर पर्रीकर राजनीति में एक सैनिक की तरह जिए। जिस तरह का सादा जीवन उन्होंने जिया वर्तमान में इसकी तुलना किसी भी नेता से नहीं की जा सकती। वह उत्तराखंड के पहले स्टेट वॉर मेमोरियल के वास्तविक सृजक हैं। वह न होते तो वॉर मेमोरियल आकार न ले पाता। उन्होंने कहा था कि वॉर मेमोरियल का उद्घाटन भी मैं ही करूंगा। पर यह विडंबना है कि तीन साल बाद भी निर्माण पूरा नहीं हो सका है। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रार्थना करूंगा कि वॉर मेमोरियल का उद्घाटन वह करें। यही पर्रीकर को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। तरुण विजय ने कहा कि शौर्य स्थल के रूप में पर्रीकर सदा उत्तराखंड की स्मृति में रहेंगे।

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