देहरादून, जेएनएन। पथरिया पीर में जहरीली शराब पीने से हुई छह मौतों के जिम्मेदार अजय सोनकर उर्फ घोंचू को पुलिस ने सोमवार शाम ईसी रोड से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के शिकंजे में फंसने से बचने के लिए वह अदालत में चल रहे पुराने मामलों में सरेंडर करने की कोशिश में था। पथरिया पीर में हुई मौतों के बाद बस्ती के लोगों ने चीख-चीख कर घोंचू का नाम लेना शुरू किया था तो वह देहरादून से रातोंरात फरार हो गया और भानियावाला के एक होटल दुबक गया। इधर, मुख्यमंत्री तक ने हर हाल में उसकी गिरफ्तारी करने का निर्देश दिया तो उसे अहसास हो गया कि अब वह ज्यादा समय तक पुलिस से नहीं बच पाएगा, लिहाजा उसने कोर्ट में सरेंडर करने की सोची और आखिरकार दबोचा गया।

एसएसपी अरुण मोहन जोशी ने मंगलवार रात प्रेस कान्फ्रेंस कर घोंचू के गिरफ्तारी की पुष्टि की और बताया कि घोंचू पर वर्ष 2005 से लेकर अब तक कुल नौ मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। इसमें से पांच शराब की तस्करी के हैं। जिस दिन पथरिया पीर में लोगों की मौत का सिलसिला शुरू हुआ, उस दिन वह जाखन स्थित अपने मकान पर था। जब उसे पता चला कि मौतों के पीछे उसे जिम्मेदार ठहराया जा रहा है तो वह अपने दोस्त के साथ हरिद्वार की ओर निकल गया और भानियावाला में एक होटल में जा छिपा। उसने अपने सभी मोबाइल नंबर बंद कर दिए थे, ताकि पुलिस उसकी लोकेशन ट्रेस न कर सके। इस दौरान उसने एक नया सिमकार्ड भी खरीदा, जिससे वह अपने जीजा से पल-पल की खबर ले रहा था। जब उसे लगा कि पुलिस उसके पीछे पड़ गई है और कहीं से भी उसे ढूंढ निकालेगी तो उसने कोर्ट में सरेंडर की सोची। इसकी आशंका पहले से ही थी, लिहाजा कोर्ट के बाहर सादे वेश में पुलिसकर्मियों की तैनाती कर दी गई थी। सोमवार शाम वह अदालत परिसर तक आया भी था, लेकिन उसे जब इस बात का आभास हुआ कि पुलिस पर नजर रखे हैं तो वह ईसी रोड की ओर निकल गया। जहां उसे पीछा कर दबोच लिया गया।

कनॉट प्लेस के ठेके से खरीदता था शराब

पूछताछ में घोंचू ने बताया कि वह कनॉट प्लेस स्थित ठेके से शराब खरीदता था। ठेके से एक पव्वा 70 रुपये में खरीद कर एजेंट को 80 रुपये में बेचता था। एजेंट उसे सौ रुपये में लोगों को बेचता था। इसके पीछे उसका तर्क था, लोगों को शराब एक तो घर पर ही मिल जाती थी, दूसरे यह कि जब ठेके बंद भी हो जाते थे तो लोगों के लिए शराब उपलब्ध रहती थी।

शराब में मिलावट की पूरी आशंका

एसएसपी ने बताया कि एम्स और मैक्स में उपचार के लिए भर्ती कराए गए लोगों के शरीर में मिथाइल एल्कोहल पाए जाने की पुष्टि हुई है, लेकिन अभी यह तय नहीं हो पाया है कि शराब में ही मिथाइल एल्कोहल था या फिर शरीर में किसी अन्य चीज के रिएक्शन से बना, इस बात की पुष्टि नहीं हुई है। इसीलिए बीते शुक्रवार को जिन तीन लोगों की मौत हुई है, उनका बिसरा जांच के लिए भेजा गया है। वहां की रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट तौर पर कहा जा सकेगा कि शराब में मिलावट की गई या देशी शराब का लॉट की अशुद्ध था। सभी पहलुओं की बारीकी से जांच की जा रही है। 

आइआइटी रुड़की के विशेषज्ञ भी कर रहे जांच

एसएसपी अरुण मोहन जोशी ने बताया कि पथरिया पीर में करनपुर और कनॉट प्लेस से शराब खरीद कर सप्लाई की गई थी। इन ठेकों से जब्त शराब के सैंपल की आइआइटी रुड़की की रसायन विभाग की टीम से जांच कराई जा रही है। इसका उद्देश्य यह है कि क्या शराब में पहले मिथाइल एल्कोहल था या नहीं। इसके लिए देशी शराब बनाने वाली डिस्टलरी दून वैली डिस्टलरी में शराब निर्माण की प्रक्रिया से लेकर उसमें प्रयुक्त होने वाली सामग्रियों की भी जांच की जाएगी। शराब के लॉट में कोई गड़बड़ी थी तो उसका असर पथरिया पीर में ही क्यों दिखा। आइआइटी रुड़की की रिपोर्ट आने में मिलावट या लॉट में गड़बड़ी की पुष्टि होने के बाद संबंधित के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

गिरफ्तारी में देरी का कराएंगे जांच: सीएम

पथरिया पीर में जहरीली शराब से मौतों के जिम्मेदार अजय सोनकर उर्फ घोंचू की गिरफ्तारी में हो रही देरी पर रविवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रशासन, पुलिस व आबकारी विभाग के अफसरों को कड़ी फटकार लगाई थी। मुख्यमंत्री के सख्त तेवर अख्तियार करने के चौबीस घंटे के भीतर घोंचू को पुलिस ने नाटकीय घटनाक्रम में गिरफ्तार कर लिया। घोंचू की गिरफ्तारी पर सीएम ने कहा कि पथरिया पीर कांड में जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और इस बात की भी जांच कराई जाएगी कि घोंचू की गिरफ्तारी में किन वजहों से इतनी देरी हुई।

जहरीली शराब की पुरानी फाइलें भी खुलीं

मार्च में टिहरी गढ़वाल के मरोड़ा गांव में भी जहरीली शराब पीने से दो लोगों की मौत हुई थी और कई लोग बीमार पड़े थे। यहां लोगों ने जो शराब पी थी, वह रायपुर क्षेत्र के एक ठेके से खरीद कर तस्करी की गई थी। वहीं, मई में नेहरू कॉलोनी थाना क्षेत्र में हरिद्वार बाईपास पर शराब का अवैध कारखाना भी पकड़ा गया था। इस कारखाने में कबाड़ की दुकानों से खरीद कर लाई गई शीशियों में मिलावटी शराब भरी जाती थी और फिर उनकी सप्लाई की जाती थी। एसएसपी ने बताया कि इन दोनों मामलों की गहनता से जांच की जा रही है। ताकि पथरिया पीर की मौतों की तह तक जाया जा सके।

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शराब कांड पर लिखित या मौखिक दें साक्ष्य

पथरिया पीर में शराब कांड पर बैठाई गई मजिस्ट्रेटी जांच शुरू कर दी गई है। सोमवार को जारी प्रेस बयान में जिलाधिकारी सी रविशंकर ने कहा कि मजिस्ट्रेटी जांच एसडीएम सदर कमलेश मेहता को सौंपी गई है। इस संबंध में किसी भी व्यक्ति को लिखित या मौखिक साक्ष्य देने हैं या अपना पक्ष रखना है तो वह एसडीएम सदर कार्यालय में उपस्थित हो सकता है। साक्ष्य देने के लिए मंगलवार से सात दिन का समय तय किया गया है। वहीं, जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराने की अवधि 15 दिन तय की गई है। 

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Posted By: Sunil Negi

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