जागरण संवाददाता, देहरदून : महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने भारतीय सभ्यता में महिला की भूमिका पर कई सारगर्भित बातें कहीं। उन्होंने कहा कि मां के दम पर ही हम श्रेष्ठ बन सकते हैं और विश्व को भी श्रेष्ठ बना सकते हैं। यह बातें उन्होंने शनिवार को दून विश्वविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र में बतौर मुख्य अतिथि कहीं।

उन्होंने अथर्ववेद के श्लोक से बात शुरू करते हुए कहा कि हम अन्न देने वाली धरती को मां और जन्म देने वाली मां को धारिणी कहते हैं। अतीत में हम श्रेष्ठ थे तो इसलिए कि तब माताएं विदुषी होती थीं। बीच के कालखंड में हमने बहुत खोया। 14वीं सदी की भाषा अंग्रेजी थी और उसे बोलने वाले श्रेष्ठ हो गए।

आज फिर स्थितियां बदल रही है विदेशी राजनयिक भी कह रहे हैं कि भारत विश्व नेता बन रहा है। विद्यालयों में छात्राओं का श्रेष्ठता प्रतिशत संकेत दे रहा है। आज मैं मलाल कर रहा हूं कि काश मेरी मां और दीदी पढ़ी लिखी होतीं। अगर समाज में महिला ज्ञानवान है तो समाज खुशहाल है।

कोई अपराध होता है तो हम कहते कि इसकी मां ने इसे अच्छे संस्कार दिए होते तो ये न होता। इस तरह एक संस्कारी मां ही सभ्य और सफल समाज की कुंजी है। वैदिक मंत्रों और गीता के श्लोकों के हवाले से उन्होंने भारतीय महिलाओं के सत्य आधारित दृष्टिकोण को कई तरह से सामने रखा। इस दौरान गोंडवाना विद्यापीठ के कुलपति डा. प्रशांत बोकारे, सोलापुर विद्यापीठ की डा. मृणालिनी फणनवीस, संवर्धिनी व्यास की मेधा आदि मौजूद रहीं।

दून विश्वविद्यालय के घोषणापत्र में होगी भविष्य की राह : कुलपति

दून विवि की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने कहा कि दो दिन का यह विमर्श आंखे खोलने वाला है। आमजन ने इस आयोजन का विजन सामने रखने की बात की। दून विवि के घोषणापत्र के रूप में यह सामने आएगा, जो इस आंदोलन में आगे की राह आसान बनाएगा। इस मंथन के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए जो पहले से ज्ञात नहीं थे।

हैप्पीनेस इंडेक्स में हम विश्व में बहुत पीछे : सीमा गायत्री

इससे पूर्व राष्ट्रसेविका समिति की प्रमुख कार्यवाह सीता गायत्री ने कहा कि भारतीय समाज में स्त्री के स्थान और योग्यता पर संदेह करने वालों को यह समझना चाहिए कि इस समाज का आधार बहुत मजबूत है और क्षमताएं अपार हैं। 75000 महिलाओं पर हुए सर्वे में यह बात भी सामने आई कि उनका हैप्पीनेस इंडेक्स 63 है। यानी यहां 100 में 63 महिलाएं खुश हैं। इस मामले दुनिया में भारत बहुत पीछे है।

राष्ट्रीय संगोष्ठी में 62 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए

दून विवि के डीन प्रो. एचसी पुरोहित ने बताया कि भारतीय नारी से जुड़े विविध विषयों पर दो दिनों में दो विशेष सत्र आयोजित किए गए। कुलपतियों और प्रोफेसरों की अध्यक्षता में हुए इन सत्रों में आफलाइन और आनलाइन कुल 62 शोध पत्र पढ़े गए। प्रो. पुरोहित ने समापन सत्र का संचालन भी किया। एक शोधार्थी के रूप में भी उन्होंने प्रतिभाग किया।

Edited By: Sunil Negi

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