देहरादून, जेएनएन। क्रिप्टो करेंसी की आभासी दुनिया के बादशाह अब्दुल शकूर की हत्या में वांछित मुनीफ के खिलाफ आव्रजन विभाग (इमीग्रेशन डिपार्टमेंट) ने लुक आउट सर्कुलर जारी कर दिया। मुनीफ के पासपोर्ट की डिटेल मिलने के बाद पुलिस को संदेह था कि वह गिरफ्त में आने के लिए विदेश भाग सकता है। लिहाजा, पुलिस ने करीब एक सप्ताह पहले ही आव्रजन विभाग को कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेज दी थी। 

थाइलैंड में भी अब्दुल शकूर का ठिकाना होने के बाद इस बात की आशंका बढ़ गई थी कि वारदात के बाद से फरार पांच आरोपित किसी भी समय देश छोड़ कर भाग सकते हैं। अभी तक जिन पांच आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है, उसमें मुनीफ, रिहाब, अरशद, आशिक व यासीन शामिल हैं। 

मुनीफ, रिहाब व अरशद शकूर के कोर टीम के सदस्य थे और शकूर के हर राज और ठिकानों के बारे में तीनों को जानकारी है। वहीं, हत्या के बाद जब उत्तराखंड पुलिस ने केरल पुलिस की मदद से फरार आरोपितों के घर पर छापा मारा तो पता चला कि 12 अगस्त से सभी घर नहीं पहुंचे हैं और नाते-रिश्तेदारों और दोस्तों से भी संपर्क नहीं साधा है। 

इस वजह से आरोपितों के विदेश भागने की आशंका को बल मिल रहा था। एसएसपी अरुण मोहन जोशी की ओर से वांछित सभी पांच आरोपितों के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी करने के लिए आव्रजन विभाग को पत्र लिया गया था, जिसमें से फिलहाल अभी मुनीफ के खिलाफ ही सर्कुलर जारी हो सका है। 

सूत्रों की मानें तो पुलिस को मुनीफ के पासपोर्ट की जानकारी मिल गई है, लेकिन बाकी के आरोपितों के पासपोर्ट का ब्योरा अभी नहीं मिल सका है। माना यह भी जा रहा है कि बाकी के चार आरोपितों के पास पासपोर्ट नहीं हो। इस बात की पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। 

यह था पूरा प्रकरण

अब्दुल शकूर को लेकर उसके दोस्त 12 अगस्त को देहरादून पहुंचे थे। यहां शहर के बाहर प्रेमनगर के पास किराये पर कमरा लिया और वहीं पर क्रिप्टो करेंसी का पासवर्ड जानने के लिए शकूर को यातनाएं देनी शुरू कीं। इन यातनाओं के चलते 29 अगस्त की रात शकूर की मौत हो गई, जिसके बाद उसके दोस्त शव को मैक्स अस्पताल में छोड़ कर भाग गए। 

दरअसल, शकूर क्रिप्टो करेंसी में लोगों से निवेश कराता था। इसके लिए कोर ग्रुप बना रखा था। कोर ग्रुप में रिहाब, अरशद, आसिफ व मुनीफ शामिल थे। कोर गु्रप के सदस्यों ने भी अपनी टीम बना रखी थी। इस टीम में आशिक, सुफेल, आफताब, फारिस ममनून, अरविंद सी व आसिफ शामिल थे। 

यह टीम क्रिप्टो करेंसी में निवेश के लिए बिचौलिए का काम करती थी। आशिक शकूर का बचपन का दोस्त था। शुरुआती दिनों में सब ठीक चलता रहा और क्रिप्टो करेंसी में हजारों लोगों से निवेश कराकर शकूर 24 साल की उम्र में ही साइबर बिजनेसमैन बन गया। 

करीब एक साल पहले वह अचानक भूमिगत हो गया। तब उसने बताया था कि उसका अकाउंट हैक हो गया है, लेकिन शकूर के गायब होने से निवेशक परेशान थे। वह उसकी तलाश में जमीन-आसमान एक किए थे, मगर उसका जब कुछ पता नहीं चला। शकूर जब सामने आया तो उसके दोस्तों ने उसके खिलाफ साजिश रचनी शुरू कर दी, जिसके तहत उसे घुमाने के बहाने देहरादून लेकर आए थे।

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लुक आउट सर्कुलर का मतलब

लुक आउट सर्कुलर विदेश भागने की आशंका वाले अपराधियों के खिलाफ आव्रजन विभाग जारी करता है। इस सर्कुलर के बाद संबंधित व्यक्ति की पूरी जानकारी सभी एयरपोर्ट को भेज दी जाती है। सर्कुलर को आव्रजन विभाग विभाग या अन्य किसी जांच एजेंसी के अनुरोध पर जारी करता है। इसके लिए संबंधित एजेंसी को संबंधित व्यक्ति का पूरा ब्योरा तय फार्मेट में देना होता है।

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देहरादून के एसएसपी अरुण मोहन जोशी के मुताबिक, शकूर की हत्या में वांछित मुनीफ के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी हो गया है। अन्य के खिलाफ भी लुक आउट सर्कुलर जारी कराने के लिए कार्रवाई जारी है।

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Posted By: Bhanu

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