जागरण संवाददाता, देहरादून। Karwa Chauth 2021 इस वर्ष करवाचौथ के निर्जला व्रत को मौसम ने और कठिन कर दिया। हालांकि, सुहागिनों ने मौसम की कठोर परीक्षा का पूरे धैर्य के साथ सामना किया। तकरीबन एक घंटा तक बादलों की ओट में छिपे रहने के बाद चांद ने दर्शन दिए, तब जाकर महिलाओं के अखंड सौभाग्य के लिए चांद को आर्घ्य देकर व्रत संपन्न किया।

मौसम विभाग ने पूर्व में ही रविवार को मौसम खराब रहने का अंदेशा जताया था। प्रदेशभर में इसका असर भी दिखा। रविवार को सुबह से ही आसमान में बादल छाए रहे। शाम को पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश के साथ बर्फबारी हुई तो दून में भी मौसम सर्द हो गया। इसके बाद शाम को दून में अचानक बारिश शुरू हो गई, जो रात तक जारी रही। इस बार रोहिणी नक्षत्र में पूजा-अर्चना के लिए शुभ मुहूर्त शाम 6:55 बजे से रात 8:51 तक था। चांद निकलने का मुहूर्त रात को 8:11 बजे था, लेकिन आसमान में बादलों ने डेरा जमा रखा था।

ऐसे में चांद के दीदार के लिए महिलाओं को इंतजार करना पड़ा। चांद के इंतजार में पूजा के लिए तैयार महिलाएं और उनके स्वजन लगातार आसमान में टकटकी लगाए हुए थे। टकटकी का सिलसिला सवा नौ बजे के बाद टूटा। चांद जैसे ही बादलों की ओट से बाहर आया, सभी के चेहरे खिल उठे। इसके बाद सुहागिनों ने विधिविधान से चांद को अघ्र्य देकर व्रत संपन्न किया। इसके बाद पतियों ने जीवनसाथी को पानी पिलाकर और मिष्ठान खिलाकर व्रत का पारण कराया। इस खास मौके पर जीवनसाथी को उपहार देकर भी प्यार जताया।

इससे पहले सुहागिनों ने सुबह होने के साथ ही करवाचौथ व्रत की तैयारी शुरू कर दी थी। सुबह घर में पूजन के बाद महिलाएं मंदिर पहुंचीं। इसके बाद हाथ में मेहंदी लगवाने और खरीदारी का सिलसिला चला। पलटन बाजार, धामावाला बाजार, आढ़त बाजार समेत अन्य बाजार में उपहार, कपड़ों, पूजन सामग्री, मिठाई आदि की खूब खरीदारी हुई। वहीं, शाम को महिलाएं मंदिरों में कीर्तन के लिए पहुंचीं।

आनलाइन खुलवाया व्रत

करवाचौथ पर कई लोग विभिन्न कारणों से अपने जीवनसाथी के साथ नहीं थे। ऐसे मेें तकनीक ने दोनों के बीच प्यार की डोर बांधी। स्मार्टफोन पर वीडियो काल के माध्यम से कई सुहागिनों ने पति का दीदार कर व्रत खोला। पति ने भी आनलाइन खरीदारी कर जीवनसाथी को उनकी पसंद का तोहफा पहुंचाया।

आचार्य डा. सुशांत जोशी ने कहा, खराब मौसम के चलते अगर चांद नजर न आए तो भी व्रत को संपन्न करने के कई विकल्प हैैं। इस स्थिति में महिलाएं चांद निकलने के समय पर आसमान की ओर देखकर चांद का ध्यान करने के बाद पति का चेहरा देखकर पूजा कर सकती हैं। इसके अलावा दीवार या कागज पर चांद की आकृति बनाकर भी पूजा करने की मान्यता है।

अमररजीत कौर का कहना है कि खराब मौसम के चलते इस साल चांद समय पर नहीं निकला। मैैंने नौ बजे तक चांद निकलने का इंतजार किया। तब भी बादल छाए हुए थे, ऐसे में पंडितों के बताए अनुसार भगवान शिव के ललाट के चांद का ध्यान कर थाल में चावल लेकर चांद की आकृति बनाकर पूजन किया। 

रेसकोर्स की प्राची जुयाल कहती हैं, मैंने करवाचौथ के दिन इतना खराब मौसम अब तक नहीं देखा था। चांद के दीदार के लिए काफी इंतजार करना पड़ा। तकरीबन साढ़े नौ बजे चांद बादलों की ओट से बाहर आया। इसके बाद पूजन कर व्रत संपन्न किया। 

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Edited By: Raksha Panthri