राज्य ब्यूरो, देहरादून: उत्तराखंड के हाईप्रोफाइल यौन उत्पीड़न व ब्लैकमेलिंग मामले की सुनवाई अब दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में होगी। इस मामले में एक पक्ष की ओर से दायर याचिका की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस इंदु मल्होत्रा की अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद यह फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि जरूरत पड़ने पर मामले में सभी गवाहों की दोबारा गवाही हो सकती है।

उत्तराखंड में यह हाईप्रोफाइल मामला वर्ष 2013 में सामने आया था। इस दौरान एक युवती ने सचिवालय सेवा के तत्कालीन अपर सचिव (अब सेवानिवृत्त) जेपी जोशी पर यौन उत्पीड़न के मामले में नई दिल्ली में एक एफआइआर दर्ज की थी। इसमें कहा गया था कि तत्कालीन अपर सचिव ने नैनीताल में गेस्ट हाउस में उसका यौन उत्पीड़न किया। इसकी एक क्लिप भी कुछ टीवी चैनलों में प्रसारित की गई थी। इसके कुछ समय बात तत्कालीन अपर सचिव जेपी जोशी द्वारा युवती और कुछ चैनल वालों के खिलाफ ब्लैकमेलिंग का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने इस दौरान मुकदमा दर्ज करने वाले महिला सहित तीन लोगों को मुख्य आरोपित बनाया था। इसके अलावा चैनल के कुछ और लोगों को आरोपित बनाते हुए इन सबकी गिरफ्तारी की गई थी।

कुछ समय पहले ब्लैकमेलिंग के आरोपितों ने सुप्रीम कोर्ट में इस मुकदमे को उत्तराखंड से दिल्ली स्थानांतरित करने को लेकर याचिका दायर की। उनका कहना था कि जेपी जोशी और उनके परिवार का उत्तराखंड में खासा प्रभाव है। ऐसे में इस मामले की निष्पक्ष सुनवाई नहीं हो सकती। इस पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद यह मामला पटियाला कोर्ट में स्थानांतरित करने के आदेश दिए हैं। याचिकाकर्ताओं के वकील एडवोकेट मोहम्मद फुजैल खान ने बताया कि कोर्ट ने इस बात को माना है कि उत्तराखंड में इस मामले की सुनवाई को प्रभावित किया जाता सकता है। उन्होंने कहा कि अब इसकी सुनवाई पटियाला हाउस कोर्ट में होगी।

Posted By: Jagran

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