जागरण संवाददाता, ऋषिकेश: प्रेम और भाईचारे का संदेश लेकर साइकिल पर लंदन से हॉन्गकॉन्ग के सफर पर निकले इंग्लैंड निवासी जैक बफे रविवार को ऋषिकेश पहुंचे। जैक ने भारत को संस्कृति का देश बताया। कहा कि अब तक डेढ़ दर्जन से अधिक देशों की सैर में उन्हें सबसे अधिक आनंद भारत की धरती पर महसूस हुआ है।

लंदन से जैक बफे ने अपनी साइकिल यात्रा की शुरुआत 18 मार्च 2018 को की थी। पूरी दुनिया को प्रेम और भाईचारे का संदेश देने के लिए इस साहसिक यात्रा पर निकले जैक बफी रविवार को तीर्थनगरी ऋषिकेश पहुंचे। जैक ने बताया कि वह अब तक करीब नौ हजार किलोमीटर का सफर अपनी साइकिल से तय कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि लंदन से उन्होंने अपनी साइकिल पर इस यात्रा की शुरुआत की। इंग्लिस चैनल को बोट के जरिये पार करने के बाद वह फ्रांस, बेल्जियम, लुकिस्टवर्ग, जर्मनी, ऑस्ट्रिया, हंगरी, रोमेरिया, मेसेडोनिया, कोस्वे, सर्विया, अल्वेनिया, ग्रीस, यूक्रेन पहुंचे। यूक्रेन से जार्जिया तक का सफर उन्होंने बोट से तय किया। जबकि जार्जिया से पुन: उन्होंने साइकिल के जरिये क्रोकस माउंटेन, एजेवाइजान की पर्वत श्रंखलाओं को नापा। इसके बाद फिर से बोट के जरिये उन्होंने कैसपियन सी को पार कर कजाकिस्तान में प्रवेश किया। यहां से तुर्किस्तान, चीन होते हुए पाकिस्तान पहुंचे। जहां से वह दो सप्ताह पूर्व बाघा बार्डर को पार कर भारत पहुंचे। भारत में वह अब तक अमृतसर, सिमला, हिमाचल व देहरादून से होते हुए ऋषिकेश पहुंचे हैं। यहां से वह टनकपुर बार्डर होते हुए नेपाल काठमांडू के लिए रवाना होंगे। जैक ने बताया कि वह लंदन में एक ट्रैवल एजेंसी में काम करते हैं। उन्होंने इस यात्रा के लिए किसी से भी आर्थिक सहायता नहीं ली, बल्कि स्वयं के खर्च पर वह यह यात्रा कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य सभी देशों को शांति व भाईचारे का संदेश देना है। जैक बफे को मिलने ऋषिकेश में उनके भाई लुई बफे भी पहुंचे। यहां स्थानीय लोगों ने दोनों भाइयों का माल्यार्पण कर स्वागत किया। इस अवसर पर महंत मनोज प्रपन्नाचार्य, अक्षत गोयल, मनन द्विवेदी, विनोद सकलानी, दिनेश सकलानी, जयराम सेमववाल, विनोद बिजल्वाण, कमलेश पैन्यूली, हेमंत पैन्यूली, राजन बिष्ट आदि मौजूद रहे।

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