देहरादून, विकास धूलिया। राज्यपाल बेबी रानी मौर्य का कहना है कि उत्तराखंड की रीढ़ यहां की महिलाएं हैं। राज्य के नौकरशाहों और युवाओं को महिलाओं के जुझारूपन और क्षमता से प्रेरणा लेनी चाहिए। अगर सब लोग पहाड़ की महिलाओं से प्रेरित होकर कार्य करें तो उत्तराखंड को देश में अव्वल नंबर का राज्य बनने से कोई रोक नहीं सकता। 

उत्तराखंड की सातवीं राज्यपाल के रूप में लगभग चार महीने पहले कार्यभार संभालने वाली बेबी रानी मौर्य ने इस दौरान देवभूमि के धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक माहौल को काफी नजदीक से देखा-परखा है। 'दैनिक जागरण' ने उत्तराखंड में अब तक के तजुर्बे पर उनसे विस्तृत बातचीत की। 
सवाल: आप चार माह का कार्यकाल पूरा करने जा रही हैं। इस अवधि में इस पर्वतीय राज्य के बारे में क्या अवधारणा बनी। 
जवाब: बहुत सकारात्मक, बहुत अच्छा राज्य है। सामाजिक ढांचे के लिहाज से बेहतरीन। यहां महिलाएं घर के साथ बाहर का काम भी पूरी निपुणता से संभालती हैं। पलायन रोकने की महिलाएं पूरी कोशिश कर रही हैं। एक तरह से वे 'की रोल' में हैं। महिलाएं सबकी प्रेरणा हैं इस राज्य में। वे सुबह चार बजे जग जाती हैं, और रात होने पर ही उनका दिन खत्म होता है। उत्तराखंड से ज्यादा जुझारू महिलाएं पूरे देश में कहीं नहीं हैं। अलबत्ता, मुझे यहा पुरुषों की भूमिका कुछ कम नजर आई। 
सवाल: आपको क्या लगता है पहाड़ की महिलाओं की कठिन जिंदगी को लेकर। 
जवाब: सच तो यह है कि अगर उत्तराखंड की महिलाओं की तरह सब अपनी भूमिका निभाएं तो राज्य को कोई तरक्की से नहीं रोक सकता। आप कह सकते हैं कि उत्तराखंड अपनी आधी आबादी के बूते ही विकास के पथ पर अग्रसर है। अगर यह कहा जाए कि इस राज्य के पर्वतीय क्षेत्र की आर्थिकी पूरी तरह महिलाओं के ही इर्द गिर्द केंद्रित है, तो यह पूरी तरह सही है। समझ नहीं आता कि क्यों लोग नौकरियों के पीछे भाग रहे हैं, यहा तो अथाह प्राकृतिक संपदा है, उससे काफी कुछ लिया जा सकता है। 
सवाल: किसी भी राज्य के विकास में ब्यूरोक्रेसी की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है। उत्तराखंड के संदर्भ में आप क्या सोचती हैं। 
जवाब: मुझे लगता है कि अखिल भारतीय सेवाओं के नए और युवा अधिकारियों की सोच अलग है। यह पीढ़ी काम करना चाहती है। राज्य के कई जिलों में तैनात युवा डीएम और सीडीओ, खासकर महिला अधिकारी, दिल से काम कर रहे हैं। इन्होंने शिक्षा में स्मार्ट स्कूल के कंसेप्ट को आगे बढ़ाया। ये दिल से चाहते हैं कि उत्तराखंड विकास के पथ पर आगे बढे़। जहांं तक नीति बनाने वाले अधिकारियों की बात है, वे भी बढि़या कर रहे हैं, इन्वेस्टर्स समिट की सफलता इसकी तस्दीक करती है। 
सवाल: आपने पिछले चार महीनों में राज्य के कई हिस्सों का भ्रमण कर जनजीवन को नजदीक से देखा। तमाम व्यवस्थाओं में किस तरह के सुधार की जरूरत आपने महसूस की।
जवाब: शहरों-कस्बों की दशा में सुधार होना चाहिए। खासकर शौचालयों की स्थिति में सुधार की गुंजाइश बहुत ज्यादा है। साफ सुथरे और जैविक उत्पादों से बने भोजन की व्यवस्था होनी चाहिए। इसके अलावा एक और चीज की ओर ध्यान गया, वह है पार्किंग। अगर वाहनों के लिए पर्याप्त जगह नहीं होगी तो बाहर से आने वाले लोगों को सबसे ज्यादा दिक्कत होती है, क्यों आएंगे लोग फिर यहा। शहरों की प्लानिंग करते वक्त अधिकारियों को इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए। 
सवाल: उत्तराखंड में पर्यटन की संभावनाओं को लेकर आपको भविष्य कैसा दिखाई देता है।
जवाब: उत्तराखंड एक खूबसूरत राज्य है और यहा का हर शहर-कस्बा पर्यटक स्थल। प्रकृति ने राज्य को भरपूर सौंदर्य से नवाजा है, जरूरत है तो बस इसे संवारने की। मसूरी, नैनीताल, अल्मोड़ा जैसे पयर्टक स्थल तो देश और दुनिया में प्रसिद्ध हैं ही, पौड़ी, पिथौरागढ़, बागेश्वर, हल्द्वानी, उत्तरकाशी जैसे छोटे कस्बे भी पर्यटन विकास की संभावनाएं समेटे हुए हैं। चार धाम, हरिद्वार व ऋषिकेश तो किसी पहचान के मोहताज हैं नहीं। 
सवाल: राज्यपाल के रूप में आप विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति भी हैं। उच्च शिक्षा की स्थिति को लेकर आपने क्या महसूस किया। 
जवाब: देहरादून, मसूरी, नैनीताल स्कूली शिक्षा के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते है। उच्च शिक्षा के दृष्टिकोण से देखें तो राज्य में कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय स्थित हैं। हाल ही में कुलपतियों का सम्मेलन आयोजित किया गया, इसमें शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने को लेकर विचार-विमर्श हुआ। राज्य के विश्वविद्यालयों में भी गुणवत्तायुक्त शिक्षा की संभावनाएं मौजूद हैं। हालाकि कुछ क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है लेकिन कमियों को दूर किया जा सकता है। 
सवाल: युवी पीढ़ी किसी भी देश या प्रदेश का भविष्य होती है, आपका क्या संदेश होगा इनके लिए। 
जवाब: नशाखोरी और पलायन, ये दो राज्य की सबसे बड़ी समस्याएं हैं। इनमें सुधार पूरी तरह आज की युवा पीढ़ी के हाथों में है। युवाओं को नशे के नुकसान के बारे में व्यापक रूप से समझा कर उन्हें इस बुरी लत से अलग किया जा सकता है। तमाम सरकारी और गैरसरकारी संस्थाएं इस दिशा में अच्छा काम कर रही हैं। इसी तरह युवाओं को बेहतर शिक्षा और रोजगार देकर पलायन को रोका जा सकता है। 

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