जागरण संवाददाता, ऋषिकेश :

उत्तराखंड की राज्यपाल बेबीरानी मौर्य ने कहा कि महर्षि पंतजलि के योग रूपी महान उपहार को विश्व तक पहुंचाने का श्रेय भारत को जाता है। योग हजारों वर्षाें से हमारी सभ्यता का अंग रहा है। योग का तात्पर्य ही जीव का परमात्मा से मिलन, जोड़ना और एकत्व है।

परमार्थ निकेतन में 30वें अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव के समापन पर राज्यपाल बेबीरानी मौर्य ने दुनिया के 80 देशों से पहुंचे 1100 से अधिक योग साधकों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि महर्षि पंतजलि का अष्टांग योग मनुष्य जीवन के पहलूओं से जुड़ा है। आज भागदौड़ भरी जिंदगी में सन्तुलन लाने में योग बेहद कारगर है। उन्होंने कहा कि योग की शिक्षा को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में प्रयोग किए जाने की जरूरत है। योग ने अब वैश्विक आंदोलन का रूप ले लिया है। योग शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं बल्कि तनाव और अवसाद जैसी समस्याओं को दूर करने में भी सहायक सिद्ध हुआ है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव के आयोजन हेतु स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज, साध्वी भगवती सरस्वती, योग जिज्ञासुओं, योगाचार्यो व परमार्थ परिवार को शुभकामनायें दी। इस अवसर पर स्वामी चिदानंद सरस्वती ने योग महोत्सव में आए सभी योगियों का आह्वान करते हुए कहा कि ''जीवन एक यात्रा है, ये यात्रा सतत चलती रहती है बाहर भी चलती है और भीतर भी। योग उस यात्रा को सरल और सहज बनाता है। जीवन की यात्रा में सभी को शांति की तलाश रहती है। शांति की तलाश वास्तव में सार्वभौमिक तलाश है। उन्होंने योग के जरिए वसुधैव कुटुम्बकम को साकार करने की अपील की। साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि आज हम वैश्विक योग रूपी एकत्व को गंगा तट पर देख रहे है। यह महोत्सव वास्तव में विश्व की 'अमूल्य विरासत' है जिसने पूरे विश्व को एक परिवार के रूप में बांध कर रखा है। इस अवसर पर हेरिबेरतो, माता ओबेला टोनालमीटल, मैक्सिको से आए टाटा तलाउविज़्कलपन्ते कुहत्ली अदि ने विचार व्यक्त किए । स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज ने राज्यपाल बेबीरानी मौर्य को रुद्राक्ष का पौधा व रुद्राक्ष की माला भेंट की।

Posted By: Jagran

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