जागरण संवाददाता, देहरादून : International Yoga Day सुखी-निरोगी काया हर किसी की चाहत होती है। निरोगी रहने के लिए लोग क्या- क्या कर जाते हैं। योग को भी निरोगी काया के लिए बेहतर उपाय माना जाता है। बीते कुछ सालों में योग के प्रति आमजन का रुझान भी काफी बढ़ा है। लगातार योग करने वालों को इसके बेहतर परिणाम भी हासिल हो रहे हैं। कई असाध्य रोग साधने में भी योग कारगर साबित हो रहा है। योग सुखी और निरोगी काया का मूलमंत्र बनता जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय योगा दिवस के मौके पर हम ऐसे ही लोग से आपका परिचय करवाने जा रहे हैं, जिन्होंने योग के जरिये कई रोगों से मुक्ति पाई।

आठ साल पुराना गठिया ठीक हुआ

तुनवाला निवासी आशा पाल सिलाई का काम करती हैं, लेकिन करीब दस साल पहले उन्हें गठिया ने जकड़ लिया। आशा ने बताया कि कई डाक्टर और अस्पतालों के चक्कर काटे, लेकिन बीमारी ठीक होने की बजाय बढ़ती चली गई। एक समय बाद बिस्तर से उठना तक मुश्किल हो गया। दो साल पहले उनके पति किसी की सलाह पर आयुर्वेद विश्वविद्यालय पहुंचे। यहां उन्हें डाक्टरों ने नियमित योग करने की सलाह दी तो दस दिन में ही परिणाम दिखना शुरू हो गया और दो महीनों में बिस्तर छोड़ दिया। आशा बताती हैं कि वह नियमित तौर पर सुबह एक घंटा योग करती हैं, अगर समय पर योग नहीं अपनाती तो शायद आज भी बिस्तर पर पड़ी होतीं।

कोलेस्ट्रोल और ट्राईगलीसेराइड पर काबू पाया

जल संस्थान के अधिशासी अभियंता बलदेव सिंह डोगरा साल भर पहले कोलेस्ट्रोल और ट्राईगलीसेराइड से परेशान थे। छाती में भारीपन, घबराहट और मोटापे से परेशान बलदेव सिंह आयुर्वेद विवि पहुंचे। यहां उन्होंने डाक्टरों की सलाह पर योग करना शुरू किया। बलदेव ने बताया कि योग के साथ उन्होंने नियमित वाक शुरू की। पिछले एक साल में उन्होंने 13 किलो वजन घटा लिया है। कोलेस्ट्रोल और ट्राईगलीसेराइड की शिकायत भी नहीं रही। उन्होंने कहा कि सही समय पर सही सलाह मिलने से उनके रोग दूर हुए। उन्होंने सभी को नियमित योग करने की सलाह दी।

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डाक्टरों ने हाथ खड़े किए तो योग बना सहारा

विद्या विहार निवासी नारायण दत्त थपलियाल डेयरी चलाते हैं। उन्होंने बताया कि सालभर पहले चोट लगने की वजह से हाथ का मांस फट गया और नस भी दब गई। कई निजी अस्पतालों के चक्कर लगाए, लेकिन डाक्टरों ने केवल बिना गारंटी के आपरेशन का रास्ता बताया। आपरेशन के बाद हाथ काम करना बंद कर दे, इसकी भी संभावना थी। लेकिन, इसी बीच आयुर्वेदिक इलाज की सलाह पर आयुर्वेदिक विवि पहुंचे। यहां डाक्टरों ने अलग-अलग योग नियमित तौर पर करने की सलाह दी। तब से रोजाना सुबह एक घंटे योग करता हूं। सालभर में ही हाथ पूरी तरह ठीक हो चुका है।

उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय देहरादून के स्वस्थवृत एवं योग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डा. नवीन जोशी का कहना है कि पिछले कुछ सालों में योग के प्रति लोग का रुझान बढ़ा है। आज हर एक किलोमीटर पर योग केंद्र तक खुल चुके हैं। योग कई असाध्य रोगों को ठीक करने में कारगर साबित हुआ है। इस योग दिवस पर सभी से अपील है कि योग को दैनिक जीवन में अपनाएं और अपनी काया को निरोगी रखें।

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Edited By: Sumit Kumar