जागरण संवाददाता, देहरादून। एक खिलाड़ी अपने बेहतरीन प्रदर्शन से ही मशहूर और सबका चहेता बनता है। ओलंपिक में प्रतिभाग कर मुकाम पा चुके खिलाड़ियों का मानना है कि अगर अपने खेल से दुनिया को लोहा मनवाना है तो जिंदगी से शार्टकट को निकाल कर लक्ष्य प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करनी चाहिए। कड़ी मेहनत और अनुशासन से ही लक्ष्य को आसानी से पाया जा सकता है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण होती है फिटनेस। फिट रहने के लिए नियमित अभ्यास और संतुलित डाइट जरूरी होती है। युवा खिलाड़ियों को फिटनेस और डाइट पर नियमित ध्यान देने की जरूरत है। खिलाड़ी की फिटनेस ही उसके भविष्य का सफर तय करती है।

ओलंपियन गुरमीत सिंह ने बताया कि मैंने भी जिला स्तर से ही करियर की शुरुआत की थी। कड़ी मेहनत से ओलंपिक तक का सफर तय किया। मेरा मानना है कि शार्टकट जैसा शब्द खिलाड़ी की शब्दावली में होना ही नहीं चाहिए। खिलाड़ी के जीवन में तमाम उतार-चढ़ाव आते हैं, लेकिन उसे अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहना चाहिए।

सुरेंद्र भंडारी का कहना है कि खिलाड़ियों को शार्टकट को जीवन से निकाल फेंकना चाहिए। इसके सिर्फ दुष्परिणाम हैं। सफल बनने के लिए लक्ष्य, कड़ी मेहनत, अनुशासन और फिटनेस को दिनचर्या में शामिल करना जरूरी है। बतौर खिलाड़ी आप में उदासीन व उतावलापन नहीं होना चाहिए। समय अनुकूल न हो तो सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

ओलंपियन मनीष रावत ने बताया कि खेल में बने रहने के लिए नियमित अभ्यास जरूरी है। रोजाना कम से कम एक घंटे का अभ्यास करने से फिट रहा जा सकता है, लेकिन खिलाड़ी को उपलब्धि के साथ अभ्यास का समय भी बढ़ाते रहना चाहिए। कठिन परिश्रम ही खिलाड़ी को सुखद परिणाम दिलाता है। इसका कोई विकल्प नहीं है।

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Edited By: Raksha Panthri