जागरण संवाददाता, देहरादून। बस पर शराब पीकर ड्यूटी करने वाले चालक और परिचालक को रोडवेज महाप्रबंधक ने सेवा से बर्खास्त करने के आदेश दिए हैं। पिछले दस दिन में ऐसे तीन मामले सामने आए हैं, जिसमें चालक व परिचालक के शराब पिये होने की वजह से यात्रियों को मुसीबत हुई। महाप्रबंधक दीपक जैन ने सभी मंडल और डिपो प्रबंधकों को चालक व परिचालक की जांच करने और मार्गों पर निरीक्षण करने का आदेश दिया है।

17 जुलाई को हल्द्वानी डिपो की बस जो हल्द्वानी-रीठा साहिब मार्ग पर संचालित हो रही थी, उसके चालक सुंदर सिंह को शराब के नशे में होने पर पुलिस ने गिरफ्तार किया व बस सीज कर दी। गत 26 जुलाई को भी काशीपुर डिपो की बस हरिद्वार से काशीपुर जाते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस ने सीज किया। बस चालक रणजीत राणा शराब के नशे में धुत था, उसे गिरफ्तार किया गया। पर्वतीय डिपो की बस में भी दून से देवलकोट जाते हुए 22 जुलाई को परिचालक दिनेश प्रसाद नशे में धुत मिला। उसे डोईवाला पुलिस ने गिरफ्तार किया, जबकि बस वापस देहरादून लानी पड़ी। इन मामलों के बाद रोडवेज की छवि भी धूमिल हुई। ऐसे में महाप्रबंधक ने अधिकारियों की जवाबदेही तय कर शराबी चालक व परिचालक पर कार्रवाई को कहा है।

क्या कर रहे डिपो एजीएम

चालकों के नशे में धुत होकर चलने और यात्रियों से दुर्व्‍यवहार के मामले सामने आने के बावजूद डिपो एजीएम आराम फरमा रहे हैं। रोडवेज कोई भी डिपो एजीएम आफिस से बाहर निकलकर चेकिंग को राजी नहीं है व न बस अड्डे पर चालकों या परिचालकों की जांच हो रही। बेधड़क यात्रियों की जान से खिलवाड़ हो रहा और हर मर्तबा मामला सामने आने पर प्रबंधन चालक-परिचालक को सेवा से निकालकर पल्ला झाड़ ले रहा।

..तो क्या सोते रहे हैं प्रवर्तन दल

रोडवेज मुख्यालय की मानें तो विभिन्न मार्गो पर 24 घंटे एक दर्जन प्रवर्तन दलों की तैनाती रहती है। इनका काम बसों में टिकट व सामान चेक करना है। अब इन्हें चालकों एवं परिचालकों के शराब पीने की जांच का जिम्मा भी दिया जा रहा। प्रबंधन एल्कोमीटर देने की तैयारी कर रहा। सवाल ये उठ रहा कि जब प्रवर्तन टीम बसों को रोककर यात्री टिकट की जांच तक नहीं कर रही तो शराब प्रकरण में जांच कैसे करेगी। रात में तो एक भी प्रवर्तन टीम की चेकिंग नहीं कर रही है।

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Edited By: Sunil Negi