देहरादून, राज्य ब्यूरो। वन विभाग के मुखिया (हॉफ) जयराज द्वारा उत्तराखंड बांस एवं रेशा विकास परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) का दायित्व देख रहे प्रमुख वन संरक्षक एसके दत्त के निलंबन की सिफारिश को लेकर मुख्य सचिव को पत्र लिखने का मामला तूल पकड़ गया है। इस प्रकरण में जयराज ने कर्मचारी संघ के हवाले से परिषद के सीईओ पर अनियमिताएं बरतने के साथ ही उन पर अल्पावधि के लिए कार्यवाहक हॉफ रहने के दौरान विवादित आदेश निर्गत करने का आरोप भी लगाया है। उधर, इस मामले में वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि दत्त लंबे अर्से से परिषद के सीईओ के पद पर हैं। यदि कहीं कोई गड़बड़ी है तो उसे अब तक क्यों संज्ञान में नहीं लाया गया। अब जबकि दत्त सेवानिवृत्त होने वाले हैं तो अचानक कैसे गड़बड़ हो गई। उन्होंने कहा कि दत्त ने कार्यवाहक हॉफ रहने के दौरान कोई विवादित आदेश नहीं किया, बल्कि सरकार के आदेश का अनुपालन किया।

हेड आफ फॉरेस्ट फोर्स (हॉफ) जयराज और प्रमुख वन संरक्षक एसके दत्त के बीच तब ठनी, जब हाल में जयराज के विदेश दौरे के दौरान उनका चार्ज दत्त के पास था। तब दत्त ने अदालत के आदेश और शासनादेश के अनुपालन में सरकार के आदेश के क्रम में वन विभाग में एसडीओ स्तर के अधिकारियों को 8900 ग्रेड वेतन अनुमन्य करने के आदेश निर्गत किए थे। वापस लौटने पर हॉफ जयराज को यह फैसला नागवार गुजरा और तीन जनवरी को दत्त के इस आदेश को विवादित ठहराते हुए निरस्त कर दिया था। प्रमुख वन संरक्षक दत्त लंबे समय से बांस एवं रेशा विकास परिषद के सीईओ भी हैं।
अब हॉफ ने परिषद के कर्मचारी संघ के ज्ञापन का हवाला देते हुए इस संबंध में मुख्य सचिव का पत्र भेजा है। इसमें दत्त के निलंबन की सिफारिश करते हुए उनके कार्यकाल में हुई कथित अनियमितताओं की जांच शासन स्तर से किसी वरिष्ठ अधिकारी से कराने का आग्रह किया गया है। पत्र में दत्त पर कार्यवाहक प्रमुख वन संरक्षक रहने के दौरान विवादित आदेश निर्गत करने का आरोप भी लगाया गया है। 
उधर, वन मंत्री डॉ.हरक सिंह रावत ने प्रमुख वन संरक्षक दत्त का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि दत्त जल्द ही सेवानिवृत्त होने वाले हैं। वह लंबे अर्से से बांस एवं रेशा विकास परिषद के सीईओ का दायित्व देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि परिषद में कहीं गड़बड़ी है तो उसे संज्ञान में लिया जाएगा, लेकिन सवाल ये भी है कि हॉफ को अचानक अनियमितता कैसे नजर आई। 
यदि अनियमितताएं थीं तो अब तक क्यों इन्हें संज्ञान में नहीं लाया गया। डॉ. रावत ने दत्त के कार्यवाहक हॉफ रहने के दौरान एसडीओ स्तर के अधिकारियों के ग्रेड वेतनमान से संबंधित आदेश को सही ठहराया। उन्होंने कहा कि दत्त ने अदालत के आदेश और शासनादेश के अनुपालन के क्रम में सरकार के आदेश पर यह फैसला लिया। ऐसे में आदेश विवादित कैसे हो सकता है। उन्होंने कहा कि ग्रेड वेतनमान से संबंधित वित्त विभाग के शासनादेश का जब अन्य विभागों के कार्मिकों को लाभ मिल सकता है तो वन विभाग को क्यों नहीं।