देहरादून, [जेएनएन]: नैनीताल हाईकोर्ट ने निजी मेडिकल संस्थानों की मनमानी पर रोक लगाते हुए एमबीबीएस के छात्रों को बड़ी राहत दी है। हिमालय इंस्टीट्यूट के खिलाफ दायर एक याचिका में कोर्ट ने छात्रों को शुल्क निर्धारण समिति द्वारा तय फीस पर ही दाखिला देने का आदेश दिया है। छात्रों को इस आशय का शपथपत्र कॉलेज को देना होगा कि फीस में बढ़ोत्तरी होती है तो उन्हें वह मान्य होगी।

बता दें कि हिमालयन इंस्टीट्यूट ने छात्रों को पुरानी फीस पर दाखिला देने से मना कर दिया था। जिसके खिलाफ छात्र कोर्ट चले गए थे। बता दें कि निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस का मामला लंबे वक्त से अनसुलझा है। बीते वर्ष भी इसे लेकर विवाद की स्थिति बनी थी। तब भी मामला हाईकोर्ट पहुंच गया था।

हाईकोर्ट के आदेश पर कॉलेजों ने छात्रों से इसे लेकर शपथ पत्र लिया कि बाद में जो भी फीस तय होगी, वह उन्हें मान्य होगी। इस बीच राज्य सरकार ने निजी कॉलेजों को फीस निर्धारण का अधिकार दे दिया। जिस पर कॉलेजों ने फीस में कई गुना वृद्धि कर दी। छात्रों के आदोलन पर सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा था। सरकार के हस्तक्षेप के बाद कॉलेजों ने अपना फैसला वापस लिया।

बहरहाल, अभी तक फीस पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। शुल्क निर्धारण का मामला उच्च न्यायालय के साथ ही प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति में विचाराधीन है। शासन ने तय किया है कि इस पर निर्णय हो जाने तक कॉलेज पूर्व निर्धारित फीस ही लेंगे। लेकिन, इस बीच कॉलेजों का तर्क है कि वह निजी विवि के अधीन हैं। एक्ट के तहत शुल्क और सीट निर्धारण का अधिकार विवि का है।

नीट-यूजी की काउंसिलिंग के प्रथम चरण में जिन छात्रों को हिमालयन इंस्टीट्यूट में सीट आवंटित की गई, उन्हें कॉलेज ने पुरानी फीस पर दाखिला देने से साफ इन्कार कर दिया। अब नैनीताल हाईकोर्ट ने छात्रों की याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें अंतरिम राहत दी है।

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