संवाद सहयोगी, गोपेश्वर: समुद्रतल से 15225 फीट की ऊंचाई पर चमोली जिले में स्थित गुरुद्वारा हेमकुंड साहिब और लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के रविवार को श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। कपाट खुलने के मौके पर 4760 श्रद्धालुओं ने पवित्र सरोवर में डुबकी लगाकर हेमकुंड साहिब में मत्था टेका।

हेमकुंड साहिब में अभी भी बर्फ की चादर बिछी हुई है, जिसे देख श्रद्धालुओं के चेहरे खिल उठे। कपाटोद्घाटन के क्रम में तड़के पंज प्यारों के नेतृत्व में श्रद्धालुओं का जत्था बेस कैंप घांघरिया से हेमकुंड साहिब पहुंचा।

अरदास के बाद सबद-कीर्तन के साथ लिया हुक्मनामा

सुबह 9:30 बजे मुख्य ग्रंथी मिलाप सिंह की अगुआई में गुरु ग्रंथ साहिब को सुशासन स्थल से दरबार साहिब में लाया गया। इसी के साथ गुरुद्वारे के कपाट खोल दिए गए। इस मौके पर अरदास हुई और सबद-कीर्तन के साथ हुक्मनामा लिया गया। जबकि, रागी भाई मोहकम सिंह व साथियों ने गुरवाणी कीर्तन की छटा बिखेरी।

परंपरानुसार गुरुद्वारा साहिब में निशान साहिब को भी बदला गया। इस दौरान सेना के बैंड की सुमधुर लहरियों के बीच हेमकुंड का माहौल भक्तिमय हो गया। धाम में दिनभर लंगर चलता रहा, जिसमें सभी श्रद्धालुओं ने गुरु का प्रसाद ग्रहण किया।

इस अवसर पर ग्रंथी कुलवंत सिंह, हेमकुंड साहिब के प्रबंधक गुरनाम ङ्क्षसह, ब्रिगेडियर देवेंद्र ङ्क्षसह, कर्नल आरएस पुंडीर, गुरुद्वारा श्री हेमकुंड मैनेजमेंट ट्रस्ट के अध्यक्ष जनक ङ्क्षसह, उपाध्यक्ष नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा आदि उपस्थित रहे। उधर, गुरुद्वारा हेमकुंड साहिब के साथ ही सुबह नौ बजे हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट भी खोले गए। सबसे पहले हक-हकूकधारी भ्यूंडार घाटी के ग्रामीणों ने पूजा-अर्चना की और फिर दिनभर श्रद्धालु मंदिर में दर्शन करते रहे। मान्यता है कि यहां पर श्रीराम के भाई लक्ष्मण ने पूर्वजन्म में शेषनाग के रूप में तपस्या की थी। यह मंदिर हेमकुंड सरोवर के किनारे गुरुद्वारा से 50 मीटर की दूरी पर विद्यमान है।

दो साल बाद लौटी रौनक

दो वर्ष बाद अपने भव्य स्वरूप में शुरू हो रही हेमकुंड साहिब की यात्रा को लेकर भ्यूंडार घाटी में उल्लास का माहौल है। घाटी के ग्रामीण गोविंदघाट से लेकर हेमकुंड साहिब के बेस कैंप घांघरिया तक होटल-ढाबा, घोड़ा-खच्चर व डंडी-कंडी समेत अन्य व्यावसायिक गतिविधि संचालित करते हैं। हालांकि, हेमकुंड साहिब पैदल मार्ग पर शीतकाल के दौरान क्षतिग्रस्त शौचालयों की अभी मरम्मत नहीं हो पाई है। इससे श्रद्धालुओं को परेशानियां झेलनी पड़ सकती हैं।

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Edited By: Sunil Negi