राज्य ब्यूरो, देहरादून: आर्थिक संकट के दौर से गुजर रही आपातकालीन सेवा 108 को कुछ हद तक संजीवनी मिली है। शनिवार को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन उत्तराखंड द्वारा 108 एंबुलेंस के संचालन के लिए एक करोड़ 51 लाख रुपये और खुशियों की सवारी के संचालन के लिए 45 लाख रुपये जारी कर दिए गए हैं। इसके अलावा 104 हेल्पलाइन के लिए 41.58 लाख रुपये जारी किए गए हैं।

इस समय तेल के लिए पैसे न होने और तकनीकी खामियों की वजह से 108 एंबुलेंस हाफ रही है। वहीं, आपातकालीन सेवा का संचालन करने वाली कंपनी जीवीके ईएमआरआई द्वारा जनवरी से कर्मचारियों को वेतन तक नहीं दिया गया है। इससे कार्मिकों के सामने भी आर्थिक संकट बना हुआ है। वहीं, पेट्रोल व डीजल न मिलने से राजधानी देहरादून समेत सभी राज्यों में पिछले कई दिन से 108 एंबुलेंस बंद पड़ी हैं। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। 108 सेवा के स्टेट हेड मनीष टिंकू का कहना है कि सरकार पर कुछ बकाया रहने की वजह से 30 से 35 प्रतिशत गाड़ियां नहीं चल पा रही हैं। करार खत्म होने की वजह से पेट्रोल पंप स्वामियों ने उधार में ईंधन देने से इन्कार कर दिया है।

गौरतलब है कि वर्ष 2008 से ही 108 सेवा का संचालन जीवीके ईएमआरआई कंपनी कर रही है। कंपनी का अनुबंध पूर्व में ही खत्म हो चुका है। कंपनी को अभी सात मार्च तक एक्सटेंशन मिला हुआ है। इसके बाद राज्य में इस सेवा का संचालन दूसरी कंपनी करेगी। वर्तमान में 108 सेवा के अंतर्गत राज्य में 139 एंबुलेंस का संचालन हो रहा है।

एनएचएम के मिशन निदेशक युगल किशोर पंत ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू रखने के लिए यह कदम उठाया गया है।

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Posted By: Jagran