विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

हेल्थ इन्श्याेरेंस पॉलिसी में ब्रेक.... नहीं मिलेगा पुरानी बीमारी के इलाज का क्लेम, ये शर्त जरूरी

Published: Fri, 11 Sep 2026 11:06 AM (IST)Updated: Fri, 11 Sep 2026 11:14 AM (IST)

उत्तराखंड राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने स्पष्ट किया है कि स्वास्थ्य बीमा पालिसी में ब्रेक आने पर पुरानी बीमारी के इलाज का क्लेम नहीं मिल सकता।

News Article Hero Image
timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

जागरण संवाददाता, देहरादून। स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी के नवीनीकरण में ब्रेक आने पर पुरानी बीमारी के इलाज का क्लेम स्वत: जारी नहीं रह सकता। उत्तराखंड राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक मामले में स्पष्ट किया कि पॉलिसी में अंतर आने के बाद पहले से मौजूद बीमारी के लिए निर्धारित प्रतीक्षा अवधि नए सिरे से लागू होगी। इसके लिए 36 माह का लगातार बीमा कवरेज पूरा होना जरूरी है।

मामला हल्द्वानी निवासी एक बीमित व्यक्ति का है। उन्होंने वर्ष 2004 से स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ले रखी थी। सितंबर 2009 में नोएडा के एक अस्पताल में उनका हिप रिप्लेसमेंट हुआ था। इस उपचार पर करीब 3.31 लाख रुपये खर्च हुए थे। उन्होंने उपचार के खर्च की भरपाई के लिए बीमा कंपनी के समक्ष क्लेम किया, लेकिन नेशनल इंश्योरेंस कंपनी ने क्लेम खारिज कर दिया।

इसके बाद उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग, नैनीताल में शिकायत की। नैनीताल जिला आयोग ने बीमित व्यक्ति के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी को क्लेम/देय बीमा राशि का भुगतान करने का आदेश दिया था। कंपनी ने इस आदेश को राज्य आयोग में चुनौती दी।

 

दस्तावेजों में सामने आया पॉलिसी का ब्रेक

राज्य आयोग की अध्यक्ष कुमकुम रानी और सदस्य बीएस मनराल की पीठ ने मामले से जुड़े दस्तावेजों की जांच की। इसमें सामने आया कि अप्रैल 2007 और सितंबर 2007 के बीच पॉलिसी में पांच माह 10 दिन का ब्रेक था। पॉलिसी की शर्त के क्लाज 4.1 के अनुसार पहले से मौजूद बीमारी के उपचार का लाभ लेने के लिए 36 माह का लगातार बीमा कवरेज पूरा करना जरूरी था।

आयोग ने माना कि पॉलिसी में ब्रेक के बाद नई पॉलिसी 25 सितंबर 2007 से प्रभावी मानी जाएगी। सितंबर 2009 में हिप रिप्लेसमेंट के समय नई पॉलिसी के तहत 36 माह पूरे नहीं हुए थे। इसलिए पुरानी बीमारी के इलाज के लिए निर्धारित प्रतीक्षा अवधि पूरी नहीं हुई थी। आयोग ने माना कि ऐसी स्थिति में बीमा कंपनी का क्लेम खारिज करना पॉलिसी की शर्तों के अनुरूप था।

राज्य आयोग ने बीमा कंपनी की अपील स्वीकार करते हुए नैनीताल जिला आयोग का भुगतान संबंधी आदेश रद कर दिया और बीमित व्यक्ति की शिकायत खारिज कर दी।