जागरण संवाददाता, देहरादून: वायुमंडल में धूल के कण स्वास्थ्य के लिहाज से नुकसानदायक हैं। ये सास के जरिये फेफड़ों तक पहुंचकर उन्हें नुकसान पहुंचा सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार धूल के कण दमा, अस्थमा और एलर्जी जैसी कई बीमारियों का कारण बनते हैं। यह उन लोगों के लिए और खतरनाक हैं, जो पहले से ही इन बीमारियों से पीड़ित हैं। उनके लिए ये जानलेवा साबित हो सकते हैं।

दून मेडिकल कॉलेज के टीचिंग अस्पताल के श्वास एवं छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. रामेश्वर पांडे के अनुसार हवा में धूल के कण दमा, किडनी, ब्लड प्रेशर और मधुमेह के मरीजों के लिए परेशानी पैदा कर रहे हैं। इनमें बच्चों और वृद्धों को ज्यादा दिक्कत पेश आ रही है। धूल के कण हवा के रास्ते सास की नली में पहुंच रहे हैं, जिससे गला चोक हो रहा है। इससे सास लेने में परेशानी हो सकती है। इस समय गर्भवती महिलाओं और किडनी के मरीजों को भी खासी सावधानी बरतने की जरूरत है। वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. प्रवीण पंवार बताते हैं कि बच्चों और बुजुर्गो का इम्यून सिस्टम मजबूत नहीं होता, जिसके चलते दोनों ही जहरीली हवा और मौसमी बीमारियों की चपेट में जल्दी आ जाते हैं। दमा के मरीजों को इस धूल भरे मौसम में खास ध्यान रखने की जरूरत है। दिल के मरीजों की दिक्कतें भी ऐसे दूषित हवा के चलते बढ़ जाती है। अगर किसी को धूल से एलर्जी है, तो वह भूलकर भी घर से बाहर ना निकलें। धूल के कण त्वचा, आखें, गला, नाक और कान को भी प्रभावित हो सकते हैं।

इन बातों का रखें ख्याल

- बाहर निकलते वक्त मास्क का उपयोग करें।

- मास्क न हो तो मुंह पर कपड़ा भी लपेटकर रख सकते हैं।

- मोटरसाइकिल चालक हेलमेट जरूर लगाएं और कार चालक शीशा बंद रखें।

- आंख के इंफेक्शन से बचने के लिए चश्मा पहनें।

Posted By: Jagran