देहरादून, राज्य ब्यूरो। उत्तराखंड के  विभिन्न अस्पतालों से पिछले पांच साल से ड्यूटी से अनुपस्थित चल रहे 35 चिकित्सकों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। इस सिलसिले में शासन ने आदेश जारी कर दिए हैं। 

राज्य में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के लड़खड़ाने के पीछे एक बड़ी वजह डॉक्टरों की कमी है। खासकर पर्वतीय क्षेत्रों में जहां, पिछले 18 साल में डॉक्टरों को पहाड़ चढ़ाने की कोशिशें अब तक परवान नहीं चढ़ पाई हैं। यही नहीं, डॉक्टरों की तैनाती होने के बावजूद वे यहां सेवाएं नहीं दे रहे। स्थिति ये है कि नियुक्ति पाए तमाम डॉक्टर पिछले कई सालों से अनुपस्थित चल रहे हैं। इसके कारण उनकी जगह नई नियुक्तियां भी नहीं हो पा रही हैं। 

इसे देखते हुए शासन ने अब ऐसे डॉक्टरों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। इस कड़ी में अनुपस्थित चल रहे 35 डॉक्टरों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। स्वास्थ्य सचिव नितेश कुमार झा की ओर से इसके आदेश जारी कर दिए गए हैं।

इन चिकित्सकों की सेवाएं समाप्त

डॉ.दीपा नेगी, डॉ.पाशुल जुगरान, डॉ. प्रदीप चंद्र शर्मा, डॉ.एमएल विश्नोई, डॉ. शमीम अहमद, डॉ.विवेकानंद सत्यबली, डॉ.युवराज सिंह जीना, डॉ. नंदन सिंह चौहान, डॉ.अवधेश कुमार, डॉ.अजीत सिंह, डॉ.विनोद कुमार ओझा, डॉ.अनूप कुमार, डॉ.विपुल बिष्ट, डॉ.विपुल बिष्ट, डॉ.गौरव कंसल, डॉ.अजय कुमार, डॉ.संजय पंत, डॉ.कांति प्रसाद कुनियाल, डॉ.अल्का पुनेठा, डॉ.जेएन पांडे, डॉ.सुधीर कुमार, डॉ.रमेश चंद्र, डॉ.अनुज भटनागर, डॉ. श्रीनंद उनियाल, डॉ.पीयूष गोयल, डॉ. शरद पांडे, डॉ.अभिताष मिश्रा, डॉ. माधवी दबे, डॉ.तरुण पाठक, डॉ.ललित कुमार, डॉ.रुचिरा पांगती, डॉ.रुचि डुगरियाल, डॉ.आशीष कुमार, डॉ. मानसी गुसाई, डॉ.अजय कुमार व डॉ. प्रियंका सिंह शामिल हैं।

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