नई टिहरी, जेएनएन। टिहरी जिले के भिलंगना ब्लाक में पर्यटन स्थलों का भंडार है, लेकिन कई पर्यटक स्थल ऐसे हैं जो नैसर्गिक सौंदर्यता से परिपूर्ण होने के बाद भी अब तक अपनी पहचान नहीं बना पाए हैं। इन पर्यटक स्थलों में एक है हटकुणी। तमाम खूबियां अपने में समेटे यह पर्यटक स्थल सड़क से नजदीक होने के बाद भी पर्यटन के मानचित्र पर नहीं पहुंच पाया है, जबकि यह स्थान यात्रा मार्ग को भी जोड़ता है। 

उत्तराखंड में यूं तो प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों की कमी नहीं है, जहां की खूबसूरत वादियां बरबस ही लोगों को अपनी ओर खींच लाती है। हर साल इन जगहों पर पर्यटकों का आना-जाना लगा रहता है। पर इन सबके बीच यहां कुछ ऐसे भी पर्यटन स्थल हैं, जो बेहद खूबसूरत हैं, लेकिन सही तरीके से प्रचार प्रसार नहीं होने के कारण कुछ ही पर्यटकों की नजर में आए हैं। ऐसा ही एक पर्यटन है टिहरी में स्थित हटकुणी। जिला मुख्यालय से करीब 90 किमी की दूरी तय कर बिनखाल मुख्य स्टेशन है। यहां से करीब चार किमी की पैदल दूरी तय कर हटकुणी पहुंचा जाता है। घने बांज के जंगलों के बीच स्थित यह स्थान पर्यटकों को आकर्षित करता है। यहां स्थित हरे-भरे मैदान इस स्थल की सुंदरता पर चार चांद लगा देते हैं। बाहर से आने वाले पर्यटक इन मैदानों में टैंट लगाकर रहते हैं। पर्यटक यहां पर खुले मैदान में बैठकर आस-पास की सुंदर वादियों का लुत्फ उठाते हैं। 

यहां से हिमालय की बर्फीली पहाड़ियां दिखाई देती हैं। स्थानीय निवासी भी काफी संख्या में यहां पहुंचते हैं। चार किमी की दूरी तय कर यहां तक पहुंचा जाता है। अन्य पर्यटक स्थलों की अपेक्षा यह स्थान सड़क से काफी नजदीक है बावजूद इसके अब तक इसे पर्यटन मानचित्र पर पहचान नहीं मिली है। पर्यटकों के अलावा प्रकृति प्रेमी भी काफी संख्या में यहां पहुंचते हैं। इसके नजदीक सिद्धपीठ ज्वालामुखी भी है। अगर इस स्थल को विकसित किया जाता है तो यह पर्यटक की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण स्थान हो सकता है। क्षेत्रवासी भी लगतार इसकी मांग करते आ रहे हैं। 

यह भी पढ़ें: उत्‍तराखंड के उच्च हिमालय में अब भी खिलखिला रहे ब्रह्मकमल, मध्य रात्रि के बाद अपने पूरे यौवन पर होता है यह फूल

पर्यटन अधिकारी एसएस यादव का कहना है कि अगर स्थानीय जनप्रतिनिध प्रस्ताव भेजते हैं तो आगे इस पर कार्यवाही की जाएगी। केदारनाथ का पैदल मार्ग भी है यह पर्यटक स्थल हटकुणी से होकर केदारनाथ धाम को जोड़ने वाला यह पैदल मार्ग भी है। पूर्व में काफी संख्या में स्थानीय निवासियों के अलावा, कांवड़िए और स्थानीय निवासी भी यहां से पैदल यात्रा पर निकलते थे। ट्रैकिंग के लिए भी यह काफी सुंदर जगह है और बाहर से काफी संख्या में ट्रैकर इस मार्ग से होकर जाते हैं।

यह भी पढ़ें: रोमांच के शौकीनों को अब रास्ता भटकने का खतरा नहीं, सहस्त्रताल रूट को किया जीपीएस ट्रैक लॉक

शॉर्ट मे जानें सभी बड़ी खबरें और पायें ई-पेपर,ऑडियो न्यूज़,और अन्य सर्विस, डाउनलोड जागरण ऐप

budget2021