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हर्षिल घाटी के रसीले सेब मंडियों में पहुंचने को तैयार, दिल्ली से अहमदाबाद तक रहती है खास मांग

Published: Mon, 26 Oct 2026 09:40 PM (IST)Updated: Mon, 26 Oct 2026 09:42 PM (IST)

हर्षिल घाटी के रसीले तुड़ाई और पैकेजिंग का काम अंतिम चरण में है। प्रतिकूल मौसम के बावजूद इस वर्ष उत्पादन बेहतर रहा है जिससे बागवानों में खुशी है।

हर्षिल घाटी में सेब करीब 125 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा है।

हर्षिल घाटी में सेब करीब 125 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा है।

HighLights

  1. हर्षिल घाटी के सेब की तुड़ाई अंतिम चरण में।

  2. उत्तराखंड में उत्तरकाशी सेब उत्पादन में अग्रणी।

  3. दिल्ली से अहमदाबाद तक हर्षिल सेब की मांग।

अजय कुमार, जागरण, उत्तरकाशी। हर्षिल घाटी का रसीला सेब देश-प्रदेश की मंडियों व बाजारों में छाने को तैयार है। घाटी में सेब की तुड़ाई अंतिम चरण में पहुंच गई है, वहीं ग्रेडिंग, छंटाई और पैकेजिंग का काम भी तेजी से चल रहा है। हर्षिल घाटी के आठ गांवों में करीब छह हजार मीट्रिक टन सेब का उत्पादन होता है। यहां के चटक लाल रंग के रायल डिलिसियस और हरे रंग के गोल्डन डिलिशियस सेब की बाजार में विशेष मांग रहती है।

उत्तराखंड में प्रतिवर्ष करीब 62 हजार मीट्रिक टन सेब का उत्पादन होता है। इसमें लगभग 27 हजार मीट्रिक टन योगदान के साथ उत्तरकाशी जनपद प्रदेश में पहले स्थान पर है। सेब उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हर्षिल घाटी के हर्षिल, झाला, सुक्की, बगोरी, मुखवा, जसपुर, पुराली और धराली गांवों के अलावा यमुनाघाटी की स्योरी फल पट्टी, नैटवाड़ और आराकोट क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर सेब की खेती होती है।

दिल्ली से अहमदाबाद तक रहती है मांग

उत्तरकाशी में रायल डिलिशियस, गोल्डन डिलिशियस, रेड डिलिशियस, गाला, रेड चीफ, आर्गन स्पर, सुपर चीफ और हेपका सहित कई किस्मों के सेब का उत्पादन होता है। इनकी मांग प्रदेश की मंडियों के साथ दिल्ली, कानपुर, चंडीगढ़ और अहमदाबाद जैसे बड़े बाजारों में भी रहती है। कई बड़ी कंपनियां और सेब कारोबारी बागवानों से सीधे संपर्क कर तुड़ाई शुरू होने से पहले ही फसल का सौदा कर लेते हैं।

मौसम की मार के बावजूद उत्पादन बेहतर

पिछले कुछ वर्षों से मौसम की अनिश्चितता और प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण सेब उत्पादन प्रभावित हुआ है। हालांकि, इस वर्ष बीते कुछ वर्षों की तुलना में उत्पादन बेहतर बताया जा रहा है। सुक्की बेल्ट में उत्पादन अपेक्षाकृत कम रहा है। यहां के सेब बागवान मोहन राणा के अनुसार, इस वर्ष करीब 70 प्रतिशत उत्पादन हुआ है। वहीं, धराली के बागवान संजय पंवार और राजेश पंवार ने बताया कि अधिक वर्षा के कारण सेब का ड्राप-फाल यानी फलों के समय से पहले गिरने की समस्या बढ़ी, लेकिन इसके बावजूद घाटी में कुल उत्पादन अच्छा रहा है।

दो हजार से अधिक बागवान जुड़े हैं सेब उत्पादन से

बागवानों के अनुसार, हर्षिल घाटी में सेब करीब 125 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा है। घाटी में दो हजार से अधिक सेब बागवान हैं। इस वर्ष यहां करीब डेढ़ लाख पेटियों से अधिक सेब उत्पादन होने की जानकारी दी गई है। बागवानों के मुताबिक, सेब की तुड़ाई लगभग 80 प्रतिशत पूरी हो चुकी है। अब ग्रेडिंग, छंटाई और पैकेजिंग के बाद सेब को विभिन्न मंडियों तक पहुंचाने की तैयारी चल रही है। फल विक्रेता तस्दीक खान ने बताया कि हर्षिल के रायल व गोल्डन डिलिसियस सेब की प्रति दस किलो की पेटी 1200 से अधिक मूल्य पर बिक रही है।

उत्तरकाशी के मुख्य उद्यान अधिकारी डा.रजनीश सिंह ने बताया कि हर्षिल घाटी में इस वर्ष सेब की अच्छी पैदावार हुई है, यहां के रसीले सेब की देशभर की मंडियों और बाजारों में मांग रहती है।विभाग की ओर से बागवानों को सब्सिडी पर सेब पैकिंग के लिए पेटियां उपलब्ध कराई गई है। अभी कुल उत्पादन के आंकड़े नहीं लिए गए हैं, जल्द आंकड़े जुटाये जायेंगे।