अर्जित अवकाश पर भी सक्रिय हरीश रावत, नेताओं के कमेट पर दिया करारा जवाब
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत अर्जित अवकाश पर भी सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं। उन्होंने अवकाश पर उठे सवालों को अपना अधिकार बताया और आलोचनाओं को राजनीति से प्रेरित करार दिया।

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत। फाइल फोटो

समय कम है?
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राज्य ब्यूरो, देहरादून। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भले ही अर्जित अवकाश पर हों, लेकिन इंटरनेट मीडिया पर वह लगातार सक्रिय हैं। हरदा ने उनके अर्जित अवकाश पर उठे सवालों का जवाब देते हुए कहा कि यह उनका अधिकार है।
उन्हें लेकर चल रही आलोचनाओं को उन्होंने राजनीति से प्रेरित बताया। इस दौरान उन्होंने अपने चुनावी रिकार्ड, बढ़ते वोट प्रतिशत और कांग्रेस के प्रति प्रतिबद्धता का हवाला देते हुए खुद को सिद्धांतों पर अडिग बताया। उन्होंने कहा कि हरीश रावत जीत और हार दोनों में सदाबहार है, आप मेरी चिंता कर रहे हैं, इसका मैं आभारी हूं।
उज्याडू बल्द टिप्पणी पर भी पलटवार
हरदा ने उज्याडू बल्द टिप्पणी को लेकर पूर्व मंत्री दिनेश अग्रवाल पर तीखा पलटवार किया है। रावत ने कहा कि यदि उन्हें यह संबोधन दिया गया है तो वे इसे आंशिक रूप से स्वीकार करते हैं, क्योंकि 2012 में मंत्रिमंडल गठन के दौरान उन्होंने ही परिस्थितियों को देखते हुए मयूख महर को योजना आयोग का अध्यक्ष बनाने और उनकी जगह दिनेश अग्रवाल को मंत्री बनाने का सुझाव दिया था।
उनके इस निर्णय के दीर्घकालिक परिणाम अब सामने आए हैं, जिससे राजनीतिक समीकरण प्रभावित हुए। उन्होंने तंज कसा कि उनके कुछ पुराने साथी आज भाजपा में प्रासंगिक बने हुए हैं और समय-समय पर उनके खिलाफ इस्तेमाल किए जाते हैं।
वरिष्ठ नेता की तौहीन चिंताजनक : खजान दास
कांग्रेस में मचे घमासान पर कैबिनेट मंत्री एवं भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता खजान दास ने चुटकी ली है। मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में उन्होंने कहा कि वैसे तो यह कांग्रेस का अंदरुनी मामला है, इसमें दखल नहीं देना चाहिए। साथ ही कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता की तौहीन होती है तो यह चिंताजनक है। कांग्रेस इसका खामियाजा भुगत सकती है। कांग्रेस में जो खींचतान चल रही है। जनता भी समझ चुकी है कि कांग्रेस का आपस का विवाद कभी सुलझता है कभी उलझता है।
हरदा पर कांग्रेस नेता जोशी की गुगली
कांग्रेस नेता प्रकाश जोशी ने हरदा के अर्जित अवकाश के आलोक में उन पर गुगली फेंकी है। एक बयान में उन्होंने कहा कि क्रिकेट और राजनीति में खेल से ज्यादा महत्वपूर्ण है, अपने विवेक से ऐसे समय या दौर का चयन करना, जब आप अपना सर्वश्रेष्ठ दे सकते हैं। फिर समय की मांग के अनुसार अपने लिए अनुकूल रोल चयन कर लेना चाहिए। दोनों ही क्षेत्रों में रिटायरमेंट शब्द के लिए कोई गुंजाइश नहीं है।
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