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हरिद्वार में गंगा किनारे संजोया जाएगा विभाजन का दर्द, 44.5 एकड़ जमीन पर बनेगा म्यूजियम

Published: Sat, 19 Sep 2026 01:27 PM (IST)Updated: Sat, 19 Sep 2026 01:33 PM (IST)

हरिद्वार में गंगा किनारे 44.5 एकड़ भूमि पर विभाजन विभीषिका स्मृति स्थल और संग्रहालय बनाने की तैयारी है।

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केदार दत्त, देहरादून। धर्मनगरी हरिद्वार में गंगा के किनारे अब देश के विभाजन की पीड़ा और उसमें जान गंवाने वाले लोगों की स्मृतियों को सहेजने की तैयारी है। वहां सिंचाई विभाग की 44.5 एकड़ भूमि में विभाजन विभीषिका स्थल और म्यूजियम बनाने के दृष्टिगत कवायद की जा रही है।

यह भूमि, विभाजन विभीषिका न्यास समिति को देने के प्रस्ताव को लेकर शासन स्तर पर मंथन चल रहा है। भूमि हस्तांतरण से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय पर न्याय विभाग से राय मांगी गई है। इसके बाद आगे की प्रक्रिया तय होगी। यदि प्रस्ताव पर सहमति बनी तो प्रस्तावित भूमि पर स्मृति स्थल के साथ म्यूजियम भी बनेगा।

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 स्मृति स्थल के साथ म्यूजियम भी बनेगा

विभाजन की त्रासदी से जुड़ी स्मृतियों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से यह परिकल्पना की गई है। वर्ष 1947 में देश के विभाजन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को विस्थापन का दंश झेलना पड़ा। हिंसा और अव्यवस्था के बीच बड़े पैमाने पर जान-माल की क्षति हुई।

ऐसे में स्मृति स्थल का उद्देश्य इस त्रासदी में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि देने के साथ ही भावी पीढ़ी को उस दौर की पीड़ा से परिचित कराना है। इसके लिए हरिद्वार इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि गंगा किनारे विभाजन की विभीषिका में जान गंवाने वालों की स्मृति में कोई समर्पित स्थल नहीं है। स्मृति स्थल और म्यूजियम के जरिए विभाजन से जुड़े दस्तावेज, स्मृतियां और इतिहास को संजोया जाएगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी रुद्रपुर के हालिया दौरे में राज्य में विभाजन विभीषिका स्मृति स्थल बनाने की घोषणा की थी। सरकार की मंशा केवल अतीत को याद करना नहीं, बल्कि यह संदेश देना भी है कि मानवता की कीमत पर हुए बंटवारे की त्रासदी कितनी गहरी होती है।

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स्मृति स्थल के लिए भूमि की उपलब्धता के दृष्टिगत सिंचाई विभाग ने हरिद्वार में दूधिया बंद-भारतमाता मंदिर रोड से लगी 17.5 हेक्टेयर यानी 44.5 एकड़ भूमि विभाजन विभीषिका न्यास समिति को देने का प्रस्ताव किया है। शुक्रवार को सचिवालय में प्रमुख सचिव सिंचाई आर.मीनाक्षी सुंदरम की अध्यक्षता में हुई बैठक में सिंचाई विभागाध्यक्ष सुभाष पांडेय समेत अन्य अधिकारियों के साथ इस प्रस्ताव पर मंथन किया गया।