देहरादून, जेएनएन। केंद्र सरकार के जम्मू-कश्मीर से अनुच्‍छे-370 के हटाए जाने की खुशी में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने स्वतंत्रता दिवस के एक दिन पहले तिरंगा यात्रा निकाली, लेकिन यहां तिरंगा यात्रा के जश्न पर वर्चस्व की लड़ाई हावी दिखी। दरअसल, एबीवीपी के दो फाड़ होने के बाद से छात्रा संगठन में अब बस एक-दूसरे से ऊपर रहने की होड़ लगी हुई है। यही वजह है कि दून में संगठन के दोनों गुटों ने अलग-अलग यात्राएं निकालीं।

बुधवार को एबीवीपी का एक गुट डीएवी कॉलेज में एकत्रित हुआ। यहां एबीवीपी के प्रांत संगठन मंत्री प्रदीप शेखावत ने गुट का नेतृत्व किया। यहां एबीवीपी के साथ युवा मोर्चा के कई चेहरे भी रैली को सफल बनाने में अपनी ताकत झोंकते दिखे। यात्रा में कॉलेज के युवाओं के अलावा कई बाहरी लोग भी शामिल हुए। उधर, एबीवीपी से टूट कर अलग हुए डीएवी के छात्र संघ अध्यक्षों के नेतृत्व में सचिवालय के पास स्थित लॉर्ड वैंकटेश्वर हॉल में दूसरे गुट के कार्यकर्ता जुटे।

यहां भी छात्र नेताओं ने पूरी ताकत झोंककर भारी संख्या में भीड़ जुटा रखी थी। इस गुट ने देश को आजादी मिले 73 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में 73 फीट के तिरंगे के साथ यात्रा निकाली। दोनों गुटों में टकराव की आशंका के चलते पुलिस फोर्स डीएवी से लेकर वैंकटेश्वर हॉल तक भारी संख्या में मौजूद रही। पुलिस ने कई दफा एबीवीपी के पदाधिकारियों से यात्रा का रास्ता बदलने की अपील की।

डीएवी से जैसे ही पहली तिरंगा यात्रा निकली, उधर सूचना पाते ही लॉर्ड वैंकटेश्वर से भी यात्रा चल पड़ी। हॉल से निकली यात्रा मुख्य यात्रा से पहले ईसी रोड पहुंच गई। यहां पुलिस ने यात्रा को रोक लिया। उधर, मुख्य दल की यात्रा भी थोड़ी देर में यहां पहुंच गई। यात्र के पहुंचते ही एबीवीपी से अलग हुए छात्रा नेताओं ने मुख्य संगठन की यात्रा को मनोबल गिराने के लिए नारेबाजी शुरू कर दी। फिर दोनों ओर से आवाज बुलंद कर नारेबाजी होने लगी। पुलिस ने दोनों गुटों के बीच टकराव की स्थिति पैदा नहीं होने दी।

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Posted By: Sunil Negi

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