राज्य ब्यूरो, देहरादून

प्रदेश के सरकारी माध्यमिक विद्यालयों में अतिथि शिक्षकों की तैनाती से पहले शासन राज्य लोक सेवा आयोग और अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के साथ मशविरा करेगा। इसके बाद ही प्रवक्ता के 4000 और एलटी के 800 पदों पर पहले से चयनित अतिथि शिक्षकों की तैनाती का रास्ता साफ होगा।

सुप्रीम कोर्ट के अतिथि शिक्षकों के संबंध में आदेश की प्रति शिक्षा महकमे को मिल चुकी है। इस आदेश को अमलीजामा पहनाने के लिए मंथन शुरू हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि अतिथि शिक्षकों की सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों पर तैनाती पूरी तरह अस्थायी होगी। उन्हें तैनाती देने से पहले चयन आयोगों के साथ बैठक कर नियमित नियुक्ति से संबंधित पहलु पर विचार करने को कहा गया है। शिक्षा सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम जल्द चयन आयोगों के साथ बैठक की तिथि तय करेंगे। यह बैठक चार हफ्ते के भीतर की जानी है।

1949 प्रवक्ताओं पर होगा फैसला अच्छी बात ये है कि राज्य लोक सेवा आयोग से एलटी से प्रवक्ता पद पर पदोन्नत 1949 शिक्षकों की सूची के बंद पड़े लिफाफे को खोलने का रास्ता भी सुप्रीम कोर्ट ने सुझाया है। पदोन्नति पर रोक के चलते यह सूची जारी नहीं हो सकी है। सुप्रीम अदालत ने इस संबंध में सरकार को हाईकोर्ट में गुहार लगाने को कहा है। ऐसा हुआ तो 1949 पदोन्नत प्रवक्ताओं को भी तैनाती देने की राह खुल सकती है। दरअसल शिक्षा विभाग की ओर से प्रवक्ताओं के रिक्त 4000 और एलटी के रिक्त 800 पदों पर अतिथि शिक्षकों के चयन की प्रक्रिया पूरी कर जिलों को मेरिट सूची भेजी जा चुकी है। 4800 अतिथि शिक्षकों के साथ ही शिक्षकों के रिक्त अन्य पदों पर भी अस्थायी तैनाती की जा सकेगी। इसके लिए मेरिट सूची से ही प्रतीक्षा सूची के जरिए अतिरिक्त पदों पर भी अतिथि शिक्षकों की तैनाती का राह सुप्रीम कोर्ट ने सुझाई है। शिक्षा सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम के मुताबिक उक्त बिंदुओं पर शिक्षा निदेशालय से प्रस्ताव मिलते ही जल्द बैठक कर फैसले लिए जाएंगे।

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