ऋषिकेश, जेएनएन। देवभूमि तीर्थ पुरोहित हक हकूकधारी महापंचायत ने चारधाम के लिए श्राइन बोर्ड के गठन संबंधी सरकार के फैसले पर सवाल उठाया है। महापंचायत ने कहा कि प्रदेश सरकार श्राइन बोर्ड पर खुली चर्चा से बचने का प्रयास कर रही है। श्राइन बोर्ड को लेकर सरकार का यह रवैया आशंका पैदा कर रहा है।

शनिवार को व्यापार सभा भवन में देवभूमि तीर्थ पुरोहित हक हकूकधारी महापंचायत ने ऋषिकेश में पत्रकार वार्ता कर श्राइन बोर्ड गठन को लेकर सरकार की मनसा पर सवाल उठाए। महापंचायत के अध्यक्ष कृष्णकांत कोटियाल ने कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार एक ओर अपने सरकारी उपक्रमों को संचालित करने में असमर्थ सिद्ध हो रही है।

वहीं, दूसरी ओर अनादिकाल से चली आ रही मंदिरों की व्यवस्था में टांग अड़ाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि जो सरकार राज्य के हॉस्पिटलों को निजी संस्थानों और मेडिकल कॉलेज सेना को सौंपने की तैयारी कर रही हो उस सरकार का श्राइन बोर्ड के माध्यम से मंदिरों के अंदर घुसने का क्या कारण है। उन्होंने कहा कि श्राइन बोर्ड पर तीर्थ पुरोहित हक हकूकधारी खुलकर चर्चा के लिए तैयार हैं। मगर, सरकार चर्चा से बच रही है। 

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27 नवंबर को चारधाम विकास परिषद के उपाध्यक्ष ने तीर्थ पुरोहितों और हक हकूकधारियों को वार्ता के लिए बुलाया। वार्ता ढंग से शुरू भी नहीं हुई थी कि सरकार ने इस पर कैबिनेट पर मुहर लगा दी। उन्होंने कहा कि धामों के विकास में तीर्थ पुरोहितों और हक हकूकधारियों की कई पीढ़ियां खपी हैं। सुविधाएं जुटाने और धामों से प्रोजेक्शन मिलने के बाद सरकार धामों तक पहुंची है।

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उन्होंने कहा कि 18 दिसंबर को उत्तरकाशी और 20 को श्रीनगर में इस मुददे पर महा रैली होगी। इसके बाद तीर्थ पुरोहित और हक हकूकधारी अपने परिवारों सहित देहरादून कूच करेंगे और मुख्यमंत्री आवास पर अनशन शुरू करेंगे। इस मौके पर महापंचायत के महामंत्री हरीश डिमरी, कोषाध्यक्ष लक्ष्मी नारायण, श्याम पंचपुरी, अनिरुद्ध प्रसाद, केशव तिवाड़ी, विनोद शुक्ला, विनोद डिमरी आदि मौजूद थे।

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Posted By: Raksha Panthari

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