देहरादून, जेएनएन। कारोबार को बढ़ाने के लिए ग्राहकों के साथ अच्छे संबंध होने बेहद जरूरी हैं। कोरोना काल में यह बात साबित हुई है। अनलॉक के बाद से ग्राहकों के साथ बना वर्षों का संबंध बहुत काम आया है। यह कहना है इसी रोड स्थित अरंचिया किचन के मालिक उज्जवल अग्रवाल का। उज्जवल अग्रवाल का कहना है कि कोरोना के चलते लागू हुए लॉकडाउन में मॉड्यूलर किचन का काम बिलकुल थम गया था। जब अनलॉक हुआ तो लगा कि रफ्तार पकड़ने में काफी समय लगेगा, लेकिन ग्राहकों के साथ वर्षों के संबंध काम आए और चंद महीनों में कारोबार ने लगभग वापसी कर ली है।

उज्जवल बताते हैं कि वह 2008 से मॉड्यूलर किचन कारोबार से जुड़े हुए हैं। शुरुआत में उन्होंने अपनी फर्म बनाई और ग्राहकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई। उसके बाद 2013 से वह अरंचिया किचन के साथ जुड़े हुए हैं। 2013 में सुभाष रोड से एक दुकान के साथ कारोबार की शुरुआत की थी। समय के साथ जरूरी बदलावों के कारण आज देहरादून में दो शोरूम हैं। उज्जवल अग्रवाल का ये भी कहना है कि कोरोना काल में लोगों को ब्रांड का महत्व समझ आया है। अनलॉक के बाद से ग्राहक ब्रांड पर विश्वास कर सेवाएं ले रहें हैं। वे उच्च स्तरीय प्रोडक्ट के साथ समय पर सर्विस भी चाहते हैं।

समाधान 1: कोरोना काल ने किया डिजिटली एक्टिव

उज्जवल अग्रवाल बताते है कि अरंचिया किचन शुरुआत से ही डिजिटल मोड पर है, लेकिन कोरोना काल ने ग्राहक को भी डिजिटली एक्टिव बनाया है। पहले ग्राहक को मॉड्यूलर किचन के सैंपल और नक्शे दिखने के लिए शोरूम पर बुलाया जाता था, लेकिन अब ये सब कार्य ऑनलाइन हो रहे हैं। इसके लिए वेबसाइट और अन्य माध्यमों को मजबूत किया गया है। इससे ग्राहकों को ऑनलाइन सैंपल, नक्शे आदि देखने और उन्हें समझने में परेशानी न हो। अनलॉक के बाद से ग्राहक घर से ही नक्शे देखकर ऑर्डर कर रहे हैं। हम उन्हें घर बैठे सुविधाएं मुहैया करवा रहे हैं।

                           (उज्जवल अग्रवाल, अरंचिया किचन के मालिक) 

समाधान 2: कर्मचारियों का रखा विशेष ध्यान

उज्ज्वल ने बताया कि कोरोना काल में कारोबार चलाने के लिए कर्मचारियों का विशेष ध्यान रखा गया है। कर्मचारियों के दिन में तीन-चार बार तापमान चेक किया जाता था। ग्राहक को भी कर्मचारियों के स्वस्थ होने से अवगत कराया जाता था। इसके अलावा कर्मचारियों को ड्रेस और आइडी कार्ड उपलब्ध कराया गया। कर्मचारियों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उनके खान पान की व्यवस्था भी की गई, जिससे कर्मचारी बाहर का खाना से बचे रहें। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में ग्राहकों को उनके घर पर सुविधा उपलब्ध कराने में कर्मचारियों का बड़ा रोल रहा है।

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समाधान 3: कारोबार पकड़ रहा रफ्तार

उज्जवल अग्रवाल बताते हैं कि कोरोना के चलते लागू लॉकडाउन से तीन महीने कारोबार बिलकुल शून्य रहा। अनलॉक में कारोबार ने धीरे-धीरे कर रफ्तार पकड़नी शुरू की, जहां ग्राहकों के साथ वर्षों पुराने संबंध काम आए। रेगुलर कस्टमर की वजह से ही कारोबार ने फिर रफ्तार पकड़ी है। उन्होंने कहा कि अब कारोबार ठीक गति से चल रहा है। उम्मीद है इस दीपावली तक कारोबार अपनी पुरानी रफ्तार पकड़ लेगा।

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