खरगे की सभा के बाद शुद्धिकरण पर कांग्रेस का तीखा हमला, कहा- 'ऐसी मानसिकता को खत्म करने की जरूरत'
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने हल्द्वानी में मल्लिकार्जुन खरगे की सभा के बाद मंच शुद्धिकरण को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल. File Photo

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राज्य ब्यूरो, देहरादून। हल्द्वानी में आठ अगस्त को हुई कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सभा के बाद कुछ लोगों द्वारा कथित तौर मंच शुद्धिकरण को लेकर सियासत गर्मा गई है।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भाजपा पर हमला बोला है। साथ ही इस शुद्धिकरण को मानवता के विरुद्ध बताते कहा कि द्वेष और भेदभाव की ऐसी मानसिकता को समाज से समाप्त करने की जरूरत है। उन्होंने इस प्रकरण में नैनीताल के एसएसपी से कार्रवाई की मांग की है।
वहीं कांग्रेस विधायक सुमित हृदयेश ने शुद्धिकरण कार्यक्रम में शामिल लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी और गिरफ्तारी की मांग की है। कहा हल्द्वानी में जो हुआ उससे पूरे देश में गलत संदेश गया है।
एसएसपी से कार्रवाई की मांग
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोदियाल ने एक वक्तव्य में कहा कि हल्द्वानी में जिस मंच से कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने जनसभा को संबोधित किया, वहां भाजपा से जुड़े कुछ लोगों ने शुद्धिकरण किया। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि कांग्रेस मानवता को सर्वोच्च धर्म मानती है और इसके लिए समर्पित है।
उन्होंने भाजपा पर जाति और धर्म के आधार पर समाज में द्वेष फैलाने तथा पोंगापंथ को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने नैनीताल के एसएसपी को फर्ज याद दिलाते कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष खरगे राष्ट्रीय नेता हैं। वह राज्यसभा में विपक्ष के नेता हैं और दलित वर्ग से आते हैं। साथ ही एसएसपी से पूछा कि भाजपा के लोगों द्वारा की गई इस तौहीन, जातिगत भेदभाव क्या उनके द्वारा पठित कानून के अंतर्गत दंडनीय नहीं है।
इस प्रकरण में एसएसपी को अपने विवेक से निर्णय लेते हुए दंडात्मक कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस प्रशासन की ओर से कार्रवाई नहीं होती है तो भाजपा की इस मानसिकता का कानून के दायरे रहकर कांग्रेस पुरजोर विरोध करेगी। समाज में जातिगत भेदभाव और छुआछूत के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए।
उन्होंने महात्मा गांधी के विचार का हवाला देते हुए कहा कि छुआछूत ईश्वर के प्रति अपराध है। आज भी यदि समाज में ऐसी भावना जीवित है तो उसे कुचलने और समाप्त करने की जरूरत है। द्वेष, भेदभाव और सामाजिक विभाजन किसी भी स्थिति में उचित नहीं है।
