राज्य ब्यूरो, देहरादून: गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) से अनिवार्य सेवानिवृत्ति पर भेजे गए कर्मचारियों के लिए एक राहत भरी खबर है। सरकार इन कर्मचारियों के साथ ही अन्य कर्मचारियों पर की गई विभागीय कार्यवाही का पुनरीक्षण कराएगी। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि एक वर्ष के अंतराल में कर्मचारियों के खिलाफ जो भी कदम उठाए गए हैं, उसका पुनरीक्षण किया जाएगा।

गढ़वाल मंडल विकास निगम में बीते वर्ष तत्कालीन प्रबंध निदेशक ज्योति यादव ने पदभार संभालने के बाद विभागीय कर्मचारियों के काम का निरीक्षण करना शुरू किया था। इस दौरान उन्होंने ऐसे कर्मचारियों की सूची बनाई, जिन पर कार्य के प्रति लापरवाही बरतने का आरोप था। विभाग ने ऐसे 50 से अधिक कर्मचारियों की सूची तैयार की। जून 2018 में ऐसे 23 कर्मचारियों को प्रबंध निदेशक के आदेश पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति प्रदान कर दी गई। इसके अलावा 20 से अधिक कर्मचारियों के वृहद स्तर पर तबादले किए गए। इसे लेकर कर्मचारियों में खासा आक्रोश देखा गया। उन्होंने तत्कालीन एमडी के खिलाफ धरना प्रदर्शन भी किया। उनका आरोप था कि संविदा कर्मचारियों के भी मूल तैनाती स्थल से अन्य राज्यों में तबादले किए गए हैं। कर्मचारी इस संबंध में पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज से भी मिले थे, जिस पर उन्हें मामले का संज्ञान लेते हुए इसका परीक्षण कराने का आश्वासन दिया गया था। इसके बाद पर्यटन मंत्री ने प्रबंध निदेशक के खिलाफ एक जांच सचिव पर्यटन दिलीप जावलकर को सौंपी थी। इसमें कर्मचारियों के खिलाफ उठाए गए कदमों को लेकर प्रबंध निदेशक का स्पष्टीकरण तलब करने के निर्देश दिए गए थे। इसके कुछ समय बाद प्रबंध निदेशक ज्योति यादव से यह पदभार हटा दिया गया।

इस संबंध में पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज का कहना है कि विभाग में बीते एक वर्ष में कर्मचारियों की अनिवार्य सेवानिवृत्ति और उनके खिलाफ उठाए गए कदमों का पुनरीक्षण किया जाएगा।

Posted By: Jagran