हरिद्वार, जेएनएन। कोरोना काल में जहां उद्योगों का पहिया थमा रहा। वहीं सकारात्मक सोच, सही रणनीति और आकर्षक योजनाओं से आयुर्वेदिक तेल बनाने वाली प्रसिद्ध कंपनी जीके बर्मन हर्बल्स ने न केवल ग्राहकों का भरोसा कायम रखा। बल्कि कोविड गाइडलाइन के अनुरूप उत्पादन भी जारी रखा। उत्तर भारत में ठंड की शुरुआत हो चुकी है, जिससे इन क्षेत्रों में डिमांड तो है ही। वहीं, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में कंपनी के उत्पादों की मांग भी बरकरार है। लॉकडाउन में करीब डेढ़ महीने कंपनी में उत्पाद बंद रहा।

अनलॉक एक में सशर्त प्लांट संचालन की अनुमति मिलने पर दो मई से तीस फीसद क्षमता के साथ उत्पादन शुरू किया गया। इस दौरान कोविड गाइडलाइन का पालन करते हुए उत्पादन से लेकर वितरण आदि का कार्य शुरू हुआ। प्लांट में घुसने से पहले कर्मचारियों को सैनिटाइज करने के साथ मास्क और ग्ल्व्स लगाने को अनिवार्य किया गया। कर्मचारियों के बीच शारीरिक दूरी के साथ ही सभी कर्मचारियों के थर्मल स्क्रीनिंग की भी व्यवस्था की गई। आज भी कंपनी में कोविड गाइडलाइन के तहत एक बस में केवल 22 कर्मचारियों को लाने और भेजने की व्यवस्था जारी है। 

35 साल पहले हुई थी कंपनी की शुरुआत

आयुर्वेदिक तेल बनाने वाली कंपनी जीके बर्मन हर्बल्स के निदेशक नीरज बर्मन और विक्रम बर्मन बताते हैं कि कंपनी की शुरुआत 35 साल पहले उनके पिता गौतम बर्मन ने बनारस से की थी। शुरुआत में कंपनी का केवल एक उत्पाद था। समय के साथ उत्पाद पर ग्राहकों का भरोसा बढ़ता गया। इसे देख कंपनी ने दो और तेल उत्पाद लांच किए। जिसकी लगभग पूरे देश में आपूर्ति होती है। 

                               (जीके बर्मन हर्बल्स के निदेशक नीरज बर्मन)

समाधान 1: कोरोना काल में भी बनी रही ग्राहकों की विश्वसनीयता 

कंपनी का हरिद्वार सिडकुल के अलावा सिक्किम में भी एक प्लांट है। हरिद्वार में कंपनी का प्लांट सिडकुल सेक्टर-6 बी के प्लॉट नंबर 14 पर है। कंपनी में लोडर को सैनिटाइज करने के बाद ही माल भरा जाता है। ग्राहकों की विश्वसनीयता कोरोना काल में भी बनी रही यह कंपनी की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

समाधान 2: बदली परिस्थितियों में उत्पाद बेचना था बेहद मुश्किल 

कंपनी निदेशक नीरज बर्मन बताते हैं कि जीके बर्मन हर्बल, सिडकुल हरिद्वार में कोरोना महामारी से बदली परिस्थितियों में उत्पाद को बेचना बेहद चुनौतीपूर्ण था, लेकिन परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालते हुए तैयार माल की सैनिटाइजेशन की व्यवस्था की गई। साथ ही प्रत्येक मालवाहक गाड़ियों को भी सैनिटाइज किया गया। आज भी उत्पाद तैयार होने के बाद उसे सैनिटाइज किया जाता है, जिससे कोरोना संक्रमण के खतरे को समाप्त किया जाए।  

                         (जीके बर्मन हर्बल्स के निदेशक विक्रम बर्मन)

समाधान 3: कर्मचारियों को दिया गया पूरा वेतन  

लॉकडाउन में जहां कई कंपनियों ने कर्मचारियों की छंटनी की, वहीं वेतन भी कम कर दिया। बावजूद इसके जीके बर्मन हर्बल्स ने सभी कर्मचारियों को पूरा वेतन दिया। वहीं मार्केटिंग से जुड़े कर्मचारियों को घर से काम करने की आजादी प्रदान की। जिससे व्यापारी में बहुत अधिक गिरावट नहीं आई। 

समाधान 4: बिक्री के लिए वितरकों को दी आकर्षक स्कीम 

कंपनी ने कठिन समय में उत्पाद की बिक्री के लिए वितरकों को आकर्षक स्कीम दी। इससे बाजार में उत्पाद की मौजूदगी बनी रही। कंपनी का वर्षों से यह ध्येय रहा है कि ग्राहकों को क्वालिटी उत्पाद दिया जाए यही कारण है कि कंपनी के उत्पाद आज भी बाजार में अपनी विश्वनीयता के कारण पहचाने जाते हैं। 

समाधान 5: सही रणनीति और सकारात्मक सोच से जीता ग्राहकों का भरोसा 

यह सत्य है कि हम जैसा सोचते हैं वैसा ही प्राप्त करते हैं। नकारात्मक सोच जहां हमें निराशावादिता और नाकामी की ओर से ले जाती है। वहीं, सकारात्मक विचार हमें सफलता की ओर अग्रसर करते हैं। सही रणनीति और सकारात्मक सोच से कोरोना काल में भी कंपनी ग्राहकों का भरोसा जीतने में कामयाब रही है। 

सहयोग से समाधान

आयुर्वेदिक तेल बनाने वाली कंपनी जीके बर्मन हर्बल्स के निदेशक नीरज बर्मन व  विक्रम बर्मन का मानना है कि सकारात्मक सोच और निरंतर प्रयास के कारण आज कंपनी लॉकडाउन की बेड़ियों से बाहर निकल चुकी है। सत्तर फीसद क्षमता के साथ काम कर रही है।

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