राज्य ब्यूरो, देहरादून। मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना पर्वतीय क्षेत्र की करीब साढ़े तीन लाख महिलाओं को चारे के बोझ से मुक्ति दिलाएगी, साथ में किसानों की आर्थिकी को सुधारने का बड़ा जरिया बनने जा रही है। सिर्फ दुग्ध उत्पादकों की आमदनी प्रति माह 1300 रुपये बढ़ने जा रही है। इस योजना के बूते उत्तराखंड दुग्ध उत्पादन में बड़ी भूमिका निभा सकता है।

पर्वतीय क्षेत्र में महिलाओं को चारे के बोझ से निजात दिलाने के लिए प्रारंभ की गई मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना किसानों को भी आत्मनिर्भर बनाने में उपयोगी साबित होने जा रही है। इस योजना में सायलेज तैयार करने के लिए 2000 एकड़ भूमि पर मक्का फसल बोने का लक्ष्य रखा गया है। मक्का को पशुओं के लिए अच्छा आहार माना जाता है। इसकी पैदावार जल्द होती है। मक्का की पैदावार 500 एकड़ से शुरू की गई थी। 

अभी 1000 एकड़ में मक्का बोया जा रहा है। इससे बन रहा सायलेज और अन्य पौष्टिक सामग्री से तैयार किए जाने वाले टीएमआर से दुग्ध उत्पादकों का फायदा देगा। खास बात ये है कि मक्का उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है। इसके माध्यम से अन्य दुग्ध उत्पादकों को चारा मुहैया कराने से किसानों की आमदनी में इजाफा होना तय है। घस्यारी कल्याण योजना में मक्का से बनने वाले सायलेज के साथ टीएमआर (संपूर्ण मिश्रित पशुआहार) को भी तैयार किया जाना है। टीएमआर से दुध की गुणवत्ता में इजाफा होगा। 

डेयरी विकास विभाग की मानें तो इससे प्रति दुग्ध उत्पादक की प्रति माह आमदनी में न्यूनतम 1300 रुपये का इजाफा हो जाएगा। पशुचारा घर पर ही उपलब्ध होने से महिलाओं के पांच से छह घंटे बचेंगे। इस अवधि में वे कृषि उद्यमिता और अन्य कार्यों को भी कर सकेंगी। स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर लघु उद्यमों के विकास का मौका उन्हें मिलेगा। पशुपालन सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम का कहना है कि इस योजना का लाभ मैदानी क्षेत्रों में भी महिलाओं, पशुपालकों और किसानों को मिलेगा।

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