गैरसैंण सत्र: सदन की अवधि पर कांग्रेस का सवाल, अपनी रणनीति भी कठघरे में
कांग्रेस ने गैरसैंण विधानसभा सत्र की अवधि पर सवाल उठाए हैं, लेकिन सदन में मुद्दों को प्रभावी ढंग से न ...और पढ़ें


समय कम है?
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राज्य ब्यूरो, गैरसैंण। ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में विधानसभा के दो-दिवसीय सत्र के आलोक में अब सियासी बहस सत्र की अवधि और विपक्ष की भूमिका पर केंद्रित हो गई है।
मौजूदा विधानसभा के अंतिम सत्र में कांग्रेस ने सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की रणनीति बनाई थी, लेकिन वह इसे धरातल पर मूर्त रूप देने में कामयाब नहीं हो पाई।
भले ही वह अब इसके लिए सत्र की कम अवधि के दृष्टिगत सरकार को निशाने पर ले रही हो, लेकिन वह भ्रष्टाचार के मुद्दे पर ही अड़ी रही। वह चाहती तो कार्यस्थगन की सूचना की ग्राह्यता पर अन्य मुद्दों को उठाकर सरकार को घेर सकती थी। जाहिर है कि उसकी अपनी रणनीति भी कठघरे में है।
मुद्दों को सदन में नहीं उठा पाई कांग्रेस
कांग्रेस ने सत्र आहूत होने की घोषणा के बाद अंकिता भंडारी को न्याय, कानून व्यवस्था, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, महिला सुरक्षा, पलायन, वन्यजीवों का आतंक जैसे मुद्दों पर सरकार को सड़क से सदन तक घेरने की बात कही थी। इसी के दृष्टिगत पार्टी ने सत्र के पहले दिन 27 अक्टूबर को विधानसभा का घेराव भी किया, लेकिन वह इन मुद्दों को सदन में नहीं उठा पाई।
यहीं उसकी रणनीतिक चूक सामने आई। कांग्रेस ने सदन के बाहर तो विभिन्न मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया, लेकिन सदन में वह सरकार को नहीं घेर पाई। यद्यपि, इसके लिए उसके पास सत्र का अंतिम दिन ही था, पर उसका भी लाभ उठाने में वह सफल नहीं हो पाई।
वह भी यह जानते हुए कि यह मौजूदा विधानसभा का अंतिम सत्र है। ये बात अलग है कि कांग्रेस अब सदन में विभिन्न मुद्दों को न उठा पाने के लिए दोष सत्र की कम अवधि के दृष्टिगत सरकार पर मढ़ रही है। अब देखने वाली बात यह होगी कि कांग्रेस आगे के लिए क्या रणनीति अपनाती है।
कांग्रेस ने सत्र के दोनों दिन कार्यवाही शुरू होने से पहले सदन के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। सत्र के अंतिम दिन हमने काम रोको प्रस्ताव के तहत भ्रष्टाचार पर चर्चा की मांग की थी, लेकिन इसे कार्य स्थगन की ग्राह्यता पर सुनने से भी इनकार कर दिया गया। दरअसल, विभिन्न मुद्दों पर सवालों का जवाब देने से बचना चाहती है, इसीलिए सत्र की अवधि दो दिन रखी गई, ताकि कांग्रेस को अपनी बात रखने का अवसर न मिल सके। सरकार ने सत्र को महज औपचारिकता तक समेट दिया। - यशपाल आर्य, नेता प्रतिपक्ष
अंकिता भंडारी हत्याकांड, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी समेत तमाम मुद्दों पर सरकार चर्चा से बच रही है। इसी के चलते सदन की अवधि मात्र दो दिन रखी गई। इसमें भी पहला दिन निधन के निदेश में गुजर गया और दूसरे दिन सरकार ने अनुपूरक बजट व अन्य विधेयक पारित कराकर महज औपचारिकता में सत्र निबटा दिया। दो दिन का सत्र आयकर दाताओं के पैसे का दुरुपयोग है। सरकार को जवाब देना चाहिए कि गैरसैंण में सत्र आयोजित करने का मकसद क्या था। कांग्रेस भ्रष्टाचार समेत विभिन्न मुद्दों पर चर्चा चाहता था, लेकिन उसकी मांग को स्वीकार नहीं किया गया। - गणेश गोदियाल, प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस
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