यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 19, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
गदरपुर बस अड्डा निर्माण पर शासन ने एमडी को सौंपी जांच
शासन ने गदरपुर बस अड्डा निर्माण में हुई वित्तीय अनियमितता को लेकर सख्ती दिखाई है। इस मामले में प्रबंध निदेशक परिवहन निगम को मामले की जांच सौंपी गई है।

राज्य ब्यूरो, देहरादून: शासन ने गदरपुर बस अड्डा निर्माण में हुई वित्तीय अनियमितता को लेकर सख्ती दिखाई है। इस मामले में प्रबंध निदेशक परिवहन निगम को मामले की जांच सौंपी गई है। उन्हें प्रकरण की गंभीरता और वित्तीय अनियमितता को देखते हुए दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए गए हैं। यह भी कहा गया है कि इस धनराशि को कहां खर्च किया गया अथवा बैंक में रखा गया, इसका संपूर्ण विवरण एक सप्ताह के भीतर शासन को उपलब्ध कराया जाए।
परिवहन निगम को ऊधमसिंह नगर जिले के अंतर्गत गदरपुर में वर्ष 2010-11 में बस अड्डा निर्माण के उद्देश्य से जमीन लेने के लिए शासन ने 1.70 करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे। यहां तकरीबन 1.5 एकड़ जमीन में बस अड्डा बनाया जाना था। यह जमीन वन विभाग की थी। इस पर विवाद हुआ और बस अड्डा नहीं बन पाया। इस स्थिति में नियमानुसार निगम को यह धनराशि शासन को वापस करनी थी लेकिन निगम ने ऐसा किया नहीं और बिना शासन की अनुमति के इस धनराशि को खर्च कर दिया गया। यह धनराशि कहां खर्च की गई, इसकी कोई जानकारी भी शासन को नहीं दी गई। शासन ने इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता और शासकीय आदेशों की अवहेलना माना है। सचिव परिवहन शैलेश बगोली ने प्रबंध निदेशक परिवहन निगम को इस मामले पूरी जांच करते हुए दोषी अधिकारियों का नाम और उनका विवरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। यह भी कहा गया है कि यदि यह राशि बैंक में रखी गई है तो उस पर अर्जित ब्याज सहित कुल उपलब्ध धनराशि का विवरण संगत अभिलेखों में सात दिनों के भीतर शासन को उपलब्ध कराया जाए।
