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गबर सिंह बिष्ट ने दुर्गम क्षेत्रों में शिक्षा को बनाया सुलभ और रोचक, राष्ट्रपति ने किया सम्मानित

By Navin papaneEdited By: Rahul Chauhan
Published: Mon, 14 Sep 2026 06:50 PM (IST)Updated: Mon, 14 Sep 2026 07:07 PM (IST)

गबर सिंह बिष्ट को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया है। उन्होंने दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों के ...और पढ़ें

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नवीन पपनै, देहरादून। पहाड़ के दुर्गम क्षेत्र के बच्चों को पढ़ाई के लिए ई-कंटेंट मिले, वे गूगल मीट और पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन (पीपीटी) के माध्यम से शिक्षा ग्रहण करें और छात्रवृत्ति से पढ़ाई कर भविष्य की नींव को मजबूत करें....। आर्थिक रूप से कमजोर और संसाधनविहीन ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों के लिए यह सपना हो सकता है, लेकिन एक शिक्षक की जिद एवं जुनून ने ऐसा कर दिखाया।

उनकी प्रतिबद्धता ने शिक्षा की ऐसी लौ प्रज्वलित की, जिससे प्रतिभाओं को अवसर मिला है। उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। गुणवत्तापरक शिक्षा और नवाचार की प्रेरणा मिली है। पढ़ाई को सरल, सहज एवं रोचक बनाने के उनके प्रभावी माड्यूल ने गांव-देहात से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक अपनी चमक बिखेरी है। इसके लिए उन्हें राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु ने शिक्षक दिवस पर गबर सिंह को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया।

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ये नवाचारी शिक्षक हैं उत्तराखंड के पौड़ी जनपद के सूदूरवर्ती ब्लाक नैनीडांडा की मैरा ग्रामसभा में स्थित राजकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय मुस्याखांद के प्रधानाध्यापक गबर सिंह बिष्ट। उनके नवाचार की यात्रा कोरोना काल से शुरू होती है।

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जब स्कूल बंद होने पर बच्चों के सामने पढ़ाई का संकट आ गया था, तब उनके मन में आनलाइन माध्यम से बच्चों को पढ़ाने का विचार आया। गणित और विज्ञान विषय को प्रत्येक छात्र तक पहुंचाने की कोशिश के तहत उन्होंने यू-ट्यूब चैनल बनाया। ई-कंटेंट तैयार कर पीपीटी के जरिये बच्चों तक अपनी बात पहुंचाने की रणनीति बनाई।

हालांकि, यह कदम चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि दुर्गम क्षेत्र में संचार सुविधा और संसाधनों का अभाव सरकारी स्कूलों में पढ़ने वालों की राह में बाधक था। डिजिटल पढ़ाई से शुरू में कम बच्चे जुड़े, लेकिन फिर संख्या बढ़ती गई।

इस बीच उन्होंने दूरदर्शन देहरादून से ज्ञानदीप कार्यक्रम के तहत बच्चों के सामने पठन-पाठन सामग्री रखी तो प्रयास सार्थक होते चले गए। आज भी स्कूल में प्रोजेक्टर से पढ़ाई होती है। दो कंप्यूटर रखे हैं।

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शिक्षक के दो अपने लैपटाप हैं। गणित और विज्ञान पढ़ाने के लिए एनिमेटेड पावरपाइंट प्रेजेंटेशन, जियोजेबरा माडल और थ्रीडी सिमुलेशन का उपयोग किया जाता है। स्कूल की छुट्टी के बाद गूगल मीट के जरिये एक्सट्रा क्लास के जरिये छात्रवृत्ति और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती है। ग्रामसभा मैरा की प्रधान सरोजनी कंडारी और उनके पति महेंद्र सिंह कंडारी कहते हैं कि शिक्षक गबर सिंह बच्चों की नींव मजबूत करने में जुटे हैं।

छात्रवृत्ति से संवार रहे भविष्य

पिछले पांच वर्ष में विद्यालय के 30 बच्चों का राज्य और राष्ट्रीय स्तर की विभिन्न छात्रवृत्तियों के लिए चयन हुआ है। ग्रामीण परिवेश के बच्चे 15 हजार, 12 हजार और 10 हजार रुपये सालाना छात्रवृत्ति से अपनी पढ़ाई को और सशक्त बना रहे हैं। गबर सिंह की ही मेहनत है कि बच्चे यह उपलब्धि हासिल कर पा रहे हैं।

सरकारी स्कूल के प्रति बढ़ा भरोसा

वर्ष 2023 में विद्यालय में सिर्फ 19 बच्चे रह गए थे। इस पर शिक्षक गबर सिंह ने अपने स्तर से प्रयास किए। आज छात्र संख्या 40 है। स्कूल में गबर सिंह के अलावा दो अन्य शिक्षक हैं। तीन कक्षाओं के बच्चों को जिस प्रकार से पढ़ाया जाता है, उससे अभिभावकों का सरकारी स्कूल के प्रति भरोसा बढ़ा है।

बच्चों ने कमाया नाम

स्कूल के बच्चों ने छात्रवृत्ति के अलावा राष्ट्रीय आविष्कार अभियान क्विज में कई बार विजय पाई है। राज्य कल्याण परिषद की ओर भ्रमण पर जाने वाली टीम में पूरे जिले से इस विद्यालय के बच्चों को मौका मिलता है। इंस्पायर अवार्ड में 13 बच्चों का चयन हुआ है। राज्य और राष्ट्रीय स्तरीय क्विज, निबंध प्रतियोगिताओं में इस स्कूल के बच्चे टाप थ्री में स्थान बनाने में कामयाब रहे हैं।

गबर सिंह को और भी कई पुरस्कार मिले

गबर सिंह ने अब तक दुर्गम क्षेत्र में ही सेवा दी है। 1991 में पौड़ी जिले के प्राथमिक विद्यालय खुटिड़ा में सहायक अध्यापक नियुक्त होने के बाद 1996 में उच्च प्राथमिक विद्यालय खुटिड़ा में शिक्षण कार्य किया। 2003 से राजकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय मुस्याखांद में तैनात हैं।

वह राष्ट्रीय स्तर पर मास्टर ट्रेनर के रूप में कई सेमिनार, लीडरशिप कार्यक्रम में हिस्सा ले चुके हैं। उन्हें 2019 में राज्यपाल पुरस्कार और 2021 में प्रतिष्ठित शैलेश मटियानी पुरस्कार मिल चुका है।

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