जागरण संवाददाता, देहरादून: वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआइ) की निदेशक डॉ. सविता ने कहा कि देश की 29 फीसद मृदा की गुणवत्ता खराब हो चुकी है। यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन टू कॉॅम्बैट डिजर्टिफिकेशन (यूएनसीसीडी) के अनुसार प्रति मिनट 10 हेक्टेयर भूमि विभिन्न गिरावट प्रक्रियाओं में खराब हो रही है। ऐसे में विभिन्न प्रकार के भूमि की जांच में मृदा के परीक्षण और भूमि सुधार के लिए उपाय करना बेहद जरूरी है। यह बात उन्होंने भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (आइसीएफआरई) से संबंधित संस्थानों के अधिकारियों और कार्मिकों के पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में कही।

सोमवार को 'एडवांस टेक्निक्स इन सॉयल, प्लांट एंड वाटर एनालिसिस' प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए निदेशक डॉ. सविता ने कहा कि वर्तमान की चुनौतियों से निपटने में यह प्रशिक्षण कारगर साबित होगा। जो कार्मिक प्रयोगशाला में प्रशिक्षण से संबंधित विषय पर काम कर रहे हैं, उन्हें आधुनिक तकनीक के बारे में भी जानकारी मिलेगी। निदेशक डॉ. सविता ने संस्थान के मृदा एवं भूमि सुधार प्रभाग की ओर से तैयार की गई मृदा स्वास्थ्य कार्ड परियोजना की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इससे देश के मृदा डाटाबेस के निर्माण में भी मदद मिल पाएगी। इस अवसर पर प्रभाग प्रमुख डॉ. विजेंद्र पाल पंवार, डॉ. पारुल भट्ट, डॉ. बीएम डिमरी आदि उपस्थित रहे।

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