देहरादून, जेएनएन। देवभूमि में पांचवें धाम के रूप में बनाए जा रहे सैन्य धाम के शिलान्यास का समय तय हो गया है। नौ नवंबर यानी राज्य स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत इसकी आधारशिला रखेंगे। महापौर सुनील उनियाल गामा ने इसके लिए चिह्नित की गई जमीन और निर्माण की तैयारियों को लेकर सोमवार को नगर निगम में अधिकारियों की बैठक ली। उन्होंने कहा कि सैन्य धाम का निर्माण मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की प्राथमिकता में शामिल है और वर्ष 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पूर्व यह अस्तित्व में आ जाएगा। सैन्य धाम सहस्रधारा रोड पर नगर निगम के पुराने ट्रेंचिंग ग्राउंड की चार हेक्टेयर जमीन पर बनना है। आठ हेक्टेयर वाले ट्रंचिंग ग्राउंड की शेष जमीन पर सिटी पार्क बनाया जाएगा।

पिछले साल राज्य स्थापना दिवस समारोह के दौरान आयोजित सैन्य शक्ति सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड में देहरादून में शौर्य स्थल सैन्य धाम बनाने का एलान करते हुए नगर निगम को जमीन चिह्नित करने के निर्देश दिए थे। पूरी तरह से डिजिटल बनने वाले धाम के दर्शन को देश-दुनिया के लोग चारधाम की तर्ज पर आएं, ऐसी सरकार की योजना है। वर्ष 1947 के बाद देश रक्षा में बलिदान देने वाले हर सैनिक का नाम सैन्य धाम में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा था कि प्रदेश में चारधाम (बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री) के बाद यह पांचवे धाम के रूप में पूजा जाएगा।

इतना ही नहीं खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पिछले साल उत्तराखंड में पांचवा धाम (सैन्य धाम) बनाने की घोषणा कर चुके हैं। प्रधानमंत्री के सुझाव पर सरकार ने दून में शौर्य स्थल को पांचवें धाम यानी सैन्य धाम के रूप में धरातल पर उतारने की योजना पर काम शुरू कर दिया था। सरकार शौर्य स्थल को लेकर पहले से पर्याप्त बजट प्रस्तावित कर चुकी है। ऐसे में शौर्य स्थल को डिजिटल धाम बनाया जाना प्रस्तावित है। सैन्य धाम में देश की रक्षा में शहीद सैनिकों की वीरगाथा से लेकर सूबे के सैनिक बाहुल्य क्षेत्र से जुड़ी जानकारी एक ही क्लिक पर मिलेगी। नगर निगम ने धाम के लिए बीती 24 फरवरी को जमीन भी फाइनल कर दी थी। उसी दौरान जमीन का सीमांकन भी प्रशासन की टीम ने कर दिया था। अब यहां निर्माण कार्य शुरू होने के लिए मुख्यमंत्री की हरी झंडी का इंतजार है, जो नौ नवंबर को मिलेगी।

इंदौर की तर्ज पर होगा डंप कूड़े का निस्तारण

सैन्य धाम और सिटी पार्क के निर्माण से पूर्व ट्रेंचिंग ग्राउंड में डंप हजारों मीटिक टन कूड़े के निस्तारण की प्रक्रिया नगर निगम ने शुरू कर दी है। निगम इंदौर की तर्ज पर कूड़े का निस्तारण करेगा। बायो रेमिडिएशन पद्धति के जरिए इंदौर में कूड़े के पहाड़ को समाप्त किया गया था। नगर आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने बताया कि इस पद्धति के माध्यम से पुराने कूड़े का निस्तारण किया जाता है, जिसमें जरूरत के हिसाब से एक या दो ट्रॉमल लगाए जाते हैं। आरडीएफ (रिफ्यूज ड्राई फ्यूल) और कंपोस्ट को कूड़े से अलग किया जाता है।

शेष की एचडीपीई लाइनर, जियो सिंथेटिक क्लेलाइनर आदि प्रोसेस के जरिए वैज्ञानिक ढंग से कैपिंग कर दी जाती है। बायो रेमिडिएशन पद्धति के जरिए कूड़ा निस्तारित करने से कंपोस्ट और आरडीएफ निकलेगा, उससे नगर निगम की कमाई भी होगी। कंपोस्ट का प्रयोग खेतों में किया जा सकता है, जबकि ज्वलनशील पदार्थ होने के चलते आरडीएफ का प्रयोग सीमेंट प्लांट आदि में किया जा सकता है।

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