जागरण संवाददाता, विकासनगर: जौनसार बावर व पछवादून के प्राइवेट अस्पताल में बूस्टर डोज की सुविधा शुरू नहीं हुई है। जिससे बूस्टर डोज लगवाने के इच्छुक व्यक्तियों की परेशानी बढ़ गई है और इसके लिए उन्हें पचास किमी की दूरी नापकर देहरादून जाना पड़ रहा है।

कोविड-19 से बचाव को सरकारी स्तर पर वैक्सीन की दो डोज सभी को निश्शुल्क लग चुकी है। वर्तमान में बूस्टर डोज लगाई जा रही है। अधिकांश साठ वर्ष से अधिक आयु वर्ग के व्यक्तियों व फ्रंट वारियर को सरकारी स्तर पर वैक्सीन लग चुकी है। लेकिन सरकार ने अब साठ वर्ष आयु वर्ग से नीचे के व्यक्तियों के लिए प्राइवेट चिकित्सा केंद्रों में बूस्टर डोज लगवाने की बाध्यता कर दी है। सरकार के इस फरमान से पछवादून व जौनसार बावर में बूस्टर डोज लेने के इच्छुक व्यक्तियों की परेशानी बढ़ गई है, क्योंकि जौनसार व पछवादून में किसी भी प्राइवेट चिकित्सा केंद्र में बूस्टर डोज लगाने की सुविधा नहीं है। पीएनबी बैंक के अधिकारी कांतिराम नौटियाल आदि का कहना है कि बूस्टर डोज लगवाने के इच्छुक व्यक्तियों को इसके लिए देहरादून जाना मजबूरी बन गई है। देहरादून आने जाने में करीब सौ किमी की दूरी नापने के साथ समय व पैसा अलग से खर्च हो रहा है। सरकार को पछवादून में बूस्टर डोज लगवाने की सुविधा मुहैया करानी चाहिए।

उधर, उप जिला चिकित्सालय विकासनगर के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. विजय सिंह का कहना है कि मामला संज्ञान में है। विवेकानंद अस्पताल प्रबंधन से इसके लिए अभी वार्ता हो रही है।

प्रोत्साहन राशि है कम

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के विकासनगर इकाई के प्रवक्ता डा. वीरेंद्र चौहान का कहना है कि प्राइवेट अस्पताल में कोविड वैक्सीनेशन के बाद मानीटरिग मुश्किल होती है। टीके का शुल्क भी बहुत कम है। मेडीकोलीगल समस्या भी हो सकती है। बीमारी का अब घातक रूप नहीं है, इसलिए बहुत कम लोग टीका लगवाने आएंगे। प्रशिक्षित स्टाफ की कमी भी है। इन सब कारणों से पछवादून में किसी भी प्राइवेट चिकित्सा केंद्र ने कोरोना से बचाव को बूस्टर डोज लगाने की सुविधा नहीं दी है। इसके पीछे एक बड़ी वजह यह भी है कि इसमें प्रोत्साहन राशि काफी कम है। ऊपर से वैक्सीन के एक्सपायरी होने व निर्धारित मरीज न आने पर खुली वैक्सीन किसी काम की नहीं रहती, उसका नुकसान भी होता है। बूस्टर डोज की वैक्सीन की कोल्ड चेन को मेंटेन रखने की जिम्मेदारी भी प्राइवेट चिकित्सा केंद्र की ही है। किसी की शरीर प्रतिरोधक क्षमता किसी वजह से न बढ़ी तो वह उसके लिए भी प्राइवेट चिकित्सा केंद्र को ही जिम्मेदार मानेगा कि पता नहीं कैसी डोज लगाई। इसके अलावा अधिकांश व्यक्तियों को सरकारी स्तर पर बूस्टर डोज लग भी चुकी है।

Edited By: Jagran