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दैनिक जागरण का अभियान, ये फुटपाथ हमारा है: दून में फुटपाथों पर पैदल चलने वालों का हक अब भी 'कैद'

Published: Mon, 22 Jun 2026 07:53 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद देहरादून में फुटपाथों पर अतिक्रमण जारी है, जिससे पैदल यात्रियों को भारी परेशानी हो रही है।

दून में फुटपाथ पैदल यात्रियों के नहीं, बल्कि कब्जेदारों के अधिकार क्षेत्र में हैं।

दून में फुटपाथ पैदल यात्रियों के नहीं, बल्कि कब्जेदारों के अधिकार क्षेत्र में हैं।

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त रखने के निर्देश दिए

  2. देहरादून में 70% से अधिक फुटपाथों पर अवैध कब्जा

  3. जिम्मेदार एजेंसियां अतिक्रमण का स्थायी समाधान नहीं खोज पाईं

अंकुर अग्रवाल, देहरादून। सुप्रीम कोर्ट ने दो दिन पहले एक बार फिर साफ कर दिया कि फुटपाथ पैदल चलने वालों के लिए हैं और जिम्मेदार एजेंसियां उन्हें अतिक्रमण मुक्त रखें। लेकिन दून में हालात ऐसे हैं कि फुटपाथ अब पैदल यात्रियों के नहीं, बल्कि कब्जेदारों के अधिकार क्षेत्र में दिखाई देते हैं।

शहर के व्यस्त बाजारों और प्रमुख मार्गों पर पैदल चलना जोखिम भरा हो चुका है। लोग फुटपाथ छोड़कर वाहनों के बीच सड़क पर चलने को मजबूर हैं। जिम्मेदार नगर निगम, प्रशासन और पुलिस का तंत्र वर्षों बाद भी इस जटिल समस्या का स्थायी समाधान खोजने में विफल रहे हैं।

Encroachment on the footpath by shopkeepers in Paltan Bazar

राजपुर रोड, सहारनपुर रोड, गांधी रोड, जीएमएस रोड, चकराता रोड, ईसी रोड, धर्मपुर और सबसे अधिक पलटन बाजार व धामावाला क्षेत्र में फुटपाथों की स्थिति सबसे खराब है। दुकानों का फैलाव, रेहड़ी-फड़, अवैध पार्किंग और अस्थायी निर्माण ने पैदल रास्तों को निगल लिया है।

मोटे तौर पर शहर के व्यावसायिक क्षेत्रों में 70 प्रतिशत से अधिक फुटपाथ किसी न किसी रूप में अतिक्रमण की चपेट में हैं। सबसे अधिक परेशानी बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को होती है, जिन्हें सड़क पर वाहनों के बीच से गुजरना पड़ता है।

स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत करोड़ों रुपये खर्च कर फुटपाथ बनाए गए, लेकिन उनका लाभ पैदल यात्रियों को नहीं मिल सका। शहर में ट्रैफिक बढ़ रहा है और दुर्घटनाओं का खतरा भी। इसके बावजूद पैदल चलने वालों के अधिकार सबसे नीचे दिखाई देते हैं।

Encroachment on the footpath by shops along the route from Peepal Mandi to Dhamawala

अदालतें बोलती रहीं, दून नहीं जागा

दून में फुटपाथों का संकट नया नहीं है। वर्ष 2012 और 2018 में उत्तराखंड हाईकोर्ट इस मामले में हस्तक्षेप कर चुका है। 2018 में कोर्ट कमिश्नर तक नियुक्त किए गए। वर्ष 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि फुटपाथ पैदल चलने वालों के लिए हैं और कब्जों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

अक्टूबर-2025 में सुप्रीम कोर्ट ने 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में फुटपाथ का आडिट कराने के आदेश दिए।

अब दो दिन पहले शीर्ष अदालत ने फिर जिम्मेदार एजेंसियों को फुटपाथ खाली कराने के निर्देश दिए हैं। लेकिन धरातलीय स्थिति यही है कि अदालतें लगातार बोल रही हैं और शहर का सिस्टम लगातार अनसुना कर रहा है।

Encroachment in front of Darshani Gate

फोटो खिंचाने तक सीमित रहे अभियान

शहर में अतिक्रमण हटाओ अभियान भी कम नहीं चले। नगर निगम और प्रशासन समय-समय पर सड़कों पर उतरे, चालान काटे, सामान जब्त किया और फोटो भी खिंचवाई गईं, लेकिन कुछ ही दिनों बाद कब्जे फिर लौट आए। नतीजा यह हुआ कि कार्रवाई से ज्यादा अतिक्रमण की वापसी स्थायी साबित हुई।

Encroachment in Darshani Gate

अभियान हार गए, कब्जे जीत गए

पलटन बाजार से लेकर राजपुर रोड तक हर कुछ महीने में अभियान चलाया जाता है। कब्जे हटते हैं, लेकिन कुछ दिन बाद फुटपाथ फिर घिर जाते हैं। स्थायी व्यवस्था और जवाबदेही तय न होने से सरकारी कार्रवाई केवल रस्म अदायगी बनकर रह गई है।

कई बार आरोप यह भी लगे कि फुटपाथों पर फड़ और रेहड़ी लगाने के नाम पर अनौपचारिक वसूली का समानांतर तंत्र काम करता है। यही वजह है कि अतिक्रमण हटाने की कवायद कभी स्थायी नतीजे तक नहीं पहुंच सकी।

Encroachment near Motibazar

पैदल यात्री सबसे बड़ा 'बेघर' वर्ग

दून में वाहन चालकों के लिए सड़कें हैं, पार्किंग के लिए जगह हैं, दुकानदारों के लिए बाजार हैं, लेकिन पैदल चलने वालों के हिस्से के फुटपाथ लगातार सिकुड़ रहे हैं।

हालत यह है कि शहर में सबसे असुरक्षित व उपेक्षित वर्ग पैदल यात्री बन चुका है। बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं रोज जोखिम उठाकर सड़क पर चलने को मजबूर हैं।

ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि स्मार्ट सिटी में आखिर पैदल आदमी की जगह कहां है?

Moti Bazar furniture market

हाकिंग नीति भी फाइलों में दबी

सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2022 में स्पष्ट कहा था कि फेरीवालों के लिए हाकिंग नीति लागू की जाए और फुटपाथों को कब्जों से मुक्त रखा जाए।

दोबारा अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की व्यवस्था बनाने की भी बात कही गई थी। लेकिन तीन वर्ष बाद भी दून में ऐसी कोई प्रभावी व्यवस्था धरातल पर नजर नहीं आती।

यही वजह है कि हर कार्रवाई के बाद फुटपाथ फिर कब्जों की गिरफ्त में चले जाते हैं। सवाल अब यह नहीं है कि फुटपाथों पर कब्जा किसने किया, बल्कि यह है कि पैदल चलने वालों का अधिकार वापस दिलाने की जिम्मेदारी कौन निभाएगा?

Encroachment on the footpath Paltan Bazar

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पैदल चलने वालों के अधिकारों की रक्षा से जुड़े हैं और नगर निगम इन्हें गंभीरता से लागू करेगा। शहर के फुटपाथों व सार्वजनिक मार्गों पर अतिक्रमण किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा। संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर संयुक्त अभियान चलाया जाएगा और दोबारा कब्जा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

- सौरभ थपलियाल, महापौर देहरादून

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