संवाद सूत्र, चकराता: जौनसार-बावर परगने में जनजाति वर्ग के युवाओं को उच्च शिक्षा की सुविधा देने के लिए राज्य सरकार ने तेरह वर्ष पूर्व चकराता में महाविद्यालय की स्थापना की। लेकिन महाविद्यालय को अभी तक विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से स्थाई संबद्धता नहीं मिल पाई है। जिसके कारण छात्र-छात्राएं कई सुविधाओं से वंचित हो रहे है। वहीं, महाविद्यालय को भी यूजीसी से मिलने वाली ग्रांट का लाभ नही मिल पा रहा है। महाविद्यालय की स्थाई संबद्धता नहीं होने से पिछले तेरह वर्षों में नैक (राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद) का निरीक्षण भी नहीं हो पाया है। महाविद्यालय को यूजीसी द्वारा मिलने वाले अनुदान से भी वंचित रहना पड़ रहा है। जिसके चलते महाविद्यालय पर्याप्त शैक्षणिक व शिक्षणेत्तर संसाधन नहीं जुटा पा रहा है। जबकि महाविद्यालय के पास यूजीसी अनुदान प्राप्ति के मानकों के अनुरूप भवन, प्रयोगशाला, पुस्तकालय सहित पर्याप्त संसाधन भी मौजूद है। ग्रांट नही मिलने से महाविद्यालय प्रशासन को राज्य सरकार के अनुदान पर ही निर्भर रहना पड़ता है। महाविद्यालय प्रशासन के अनुसार, अतिरिक्त संसाधनों के लिए सरकारी महाविद्यालयों को अक्सर यूजीसी से अनुदान दिया जाता है, लेकिन चकराता महाविद्यालय को यूजीसी की स्थाई संबद्धता नहीं मिलने से अनुदान राशि भी नहीं मिल पा रही है। जबकि यूजीसी, नैक के निरीक्षण के आधार पर महाविद्यालयों का निरीक्षण कर उनमें शैक्षणिक व शिक्षणेत्तर गतिविधियों का मूल्यांकन करता है जिसके बाद महाविद्यालय की व्यवस्था सुधारने को आवश्यक कार्रवाई की जाती है। लेकिन चकराता महाविद्यालय नैक के निरीक्षण से भी वंचित है। ----------- स्थाई संबद्धता के लिए आवश्यक शर्तें -कक्षाएं व प्रयोगशाला समेत अन्य आवश्यक संसाधनों के साथ कॉलेज का अपना भवन होना चाहिए। -जिन विषयों में संबद्धता दी जानी है, उनमें शिक्षक होने अनिवार्य हैं। ------------ 'महाविद्यालय को स्थाई संबद्धता के लिए शासन के माध्यम से यूजीसी को पिछले पांच वर्षों से लगातार प्रस्ताव भेजा जा रहा है। इस वर्ष कंप्यूटर प्रयोगशाला सहित अतिरिक्त कक्षा कक्षों से संबंधित दस्तावेज भी सौंप दिए गए हैं। साथ ही सभी आवश्यक शर्तें पूरी करने की लिखित जानकारी मुहैया करा दी गई है। नए शिक्षा सत्र तक स्थाई संबद्धता का अनुरोध किया गया है।' डॉ. सोहनलाल भट्ट, प्राचार्य चकराता महाविद्यालय