मत्स्य पालन सचिव ने मुनस्यारी में 'कोल्ड वाटर फिशरीज क्लस्टर' का दौरा किया, किसानों से की बात
केंद्रीय मत्स्य पालन सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने पिथौरागढ़ के मुनस्यारी में कोल्डवाटर एक्वाकल्चर विकास की समीक्षा की और स्थानीय ...और पढ़ें
-1792335395450_m.webp)
HighLights
मत्स्य पालन सचिव ने मुनस्यारी में कोल्डवाटर एक्वाकल्चर की समीक्षा की।
रेनबो ट्राउट फार्मिंग से स्थानीय किसानों की आजीविका सुधरी।
पिथौरागढ़ PMMSY के तहत कोल्ड वाटर फिशरीज क्लस्टर घोषित।
डिजिटल डेस्क, पिथौरागढ़। केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के मत्स्य पालन विभाग के सचिव, डॉ. अभिलक्ष लिखी ने हिमालयी क्षेत्र में कोल्डवाटर एक्वाकल्चर (ठंडे पानी में मत्स्य पालन) के विकास की समीक्षा करने के लिए 18 अक्टूबर 2026 को उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी का आधिकारिक दौरा किया।
दौरे के दौरान, सचिव ने मुनस्यारी स्थित जोहार मत्स्य स्वायत्त सहकारिता और नामजाला ट्राउट फार्म के किसानों से बातचीत की। उन्होंने एक स्थायी आजीविका के रूप में 'रेनबो ट्राउट' फार्मिंग अपनाने के लिए स्थानीय सहकारी समितियों की सराहना की।
उन्होंने कहा कि गोरी गंगा नदी की बर्फीली धाराओं और अनुकूल जल तापमान के कारण मुनस्यारी 'रेनबो ट्राउट' पालन के एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरा है, जिसने इसे व्यावसायिक रूप दे दिया है। डॉ. लिखी ने ट्राउट मछली किसानों से उनके अनुभव और सुझाव भी साझा किए।
भारत सरकार ने देश भर में 34 'मत्स्य पालन क्लस्टर' नोटिफाई किए हैं, जिनमें पिथौरागढ़ को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत 'कोल्ड वाटर फिशरीज क्लस्टर' घोषित किया गया है। इसका उद्देश्य मत्स्य पालन सहकारी समितियों को मजबूत करना, आजीविका के अवसर बढ़ाना और सतत विकास को बढ़ावा देना है।
उत्तराखंड सरकार का मत्स्य पालन विभाग वर्तमान में नेपाल को ट्राउट का निर्यात कर रहा है और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के साथ हुए एक समझौते के तहत उन्हें भी ट्राउट की आपूर्ति कर रहा है।
सचिव ने रेखांकित किया कि उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों में ठंडे पानी का मत्स्य पालन आजीविका, पोषण सुरक्षा और निर्यात के लिहाज से रणनीतिक महत्व रखता है।
उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने PMMSY के तहत इन क्षेत्रों में ₹2,299 करोड़ से अधिक का निवेश किया है। इन राज्यों में 5,600 से अधिक रेसवे, 54 हैचरी, 293 कोल्ड स्टोरेज और 260 फीड मिल स्वीकृत किए गए हैं। पिछले एक दशक में ट्राउट उत्पादन छह गुना बढ़कर लगभग 5,000 मीट्रिक टन (MT) प्रति वर्ष हो गया है। जून 2026 में उत्तराखंड ने नेपाल को अपना पहला अंतरराष्ट्रीय निर्यात भी किया था।
उत्तराखंड में ₹317 करोड़ की परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं, जिनमें आधुनिक मछली बाजार, लैंडिंग सेंटर और सितारगंज में एक एकीकृत एक्वापार्क शामिल है। राज्य सरकार ने ₹170 करोड़ के परिव्यय के साथ 'ट्राउट प्रोत्साहन योजना' भी शुरू की है, जिसका लक्ष्य 2028-29 तक 1,500 रेसवे, 100 मिनी हैचरी और 600 कोल्ड स्टोरेज सुविधाएं स्थापित करना है।
डॉ. लिखी ने मुनस्यारी में रेनबो ट्राउट को लाने और बीज उत्पादन, रोग प्रबंधन एवं किसान प्रशिक्षण में वैज्ञानिक सहायता प्रदान करने के लिए आईसीएआर-केंद्रीय शीतजल मत्स्य अनुसंधान संस्थान (DCFR), भीमताल की भूमिका की भी सराहना की।
यह दौरा सीमावर्ती गांवों में ट्राउट फार्मिंग के सामाजिक-आर्थिक प्रभाव को भी रेखांकित करता है, जो आजीविका के साधन, इको-टूरिज्म के अवसर और ITBP के साथ संस्थागत बाजार संपर्क प्रदान कर रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह पहल न केवल किसानों की आय बढ़ा रही है, बल्कि महासीर जैसी लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण और सीमावर्ती ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं को भी मजबूत कर रही है।
