देहरादून, जेएनएन। कोरोना का संक्रमण निरंतर ऊपर चढ़ रहा है और अभी दूर-दूर तक कोरोना की वैक्सीन का पता नहीं है। वहीं, अनलॉक का 5वां चरण शुरू होने के बाद कुछ दिन के भीतर बची-खुची पाबंदियां भी हटा दी जाएंगी। ऐसे में जाने-अनजाने हम एक दूसरे के संपर्क में आते रहेंगे और कोरोना से बचाव किसी चुनौती से कम नहीं होगा। ऐसे में जिलाधिकारी ने कोरोना से जंग करने को 'जागरूकता और आइवरमेक्टिन' का मूलमंत्र दिया है। उन्होंने कहा कि कोरोना के खतरे को कम करने के लिए अनिवार्य रूप से मास्क पहना जाए, सैनिटाइजर का प्रयोग किया जाए और शारीरिक दूरी के नियमों का पालन करना जरूरी है। इसके अलावा शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए आइवमेक्टिन दवा की खुराक लेना भी जरूरी है।

जिलाधिकारी डॉ. आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि जागरूकता संबंधी गतिविधियां तेज करने और आइवरमेक्टिन दवा का सेवन बढ़ाने की जिम्मेदारी मुख्य चिकित्साधिकारी और सभी उपजिलाधिकारियों को दी गई है। कोरोना संक्रमण की रोकथाम में लगे सभी कार्मिकों को अनिवार्य रूप से आइवरमेक्टिन का सेवन कराया जा रहा है। सब्जी मंडियों व औद्योगिक क्षेत्रों में आइवरमेक्टिन के निश्शुल्क वितरण के निर्देश दिए गए हैं। दूसरी तरफ प्रमुख चिकित्सालयों समेत प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी पर्याप्त मात्र में आइवरमेक्टिन दवा की आपूर्ति की गई है।

आइवरमेक्टिन की 30 हजार टैबलेट का निश्शुल्क वितरण

अपर जिलाधिकारी (प्रोटोकॉल) जीसी गुणवंत ने बताया कि जिलेभर में आइवरमेक्टिन की 30 हजार टैबलेट का वितरण किया जा चुका है। एक व्यक्ति को एक टैबलेट लेने के बाद सात दिन के अंतराल में एक और टैबलेट लेनी होती है। इस तरह करीब 15 हजार व्यक्तियों को इसका सेवन कराया जा चुका है।

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कोरोना पॉजिटिव आने पर चिकित्सक के परामर्श के बाद आइवरमेक्टिन की खुराक तय की जानी चाहिए। विभिन्न मेडिकल स्टोर से भी आइवरमेक्टिन दवा की टैबलेट खरीदी जा सकती है। इससे कोरोना संक्रमण के प्रति शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद मिल रही है। 

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Edited By: Raksha Panthari