देहरादून, राज्य ब्यूरो। देशभर में तेजी से नाम बना रहे उत्तराखंड के कृषि, फार्मा व अन्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ाने के लिए प्रदेश सरकार निर्यात नीति बना रही है। सरकार का मकसद आने वाले वर्षो में प्रदेश से होने वाली निर्यात दर (0.5 प्रतिशत) को दोगुना करना है। प्रदेश सरकार जल्द ही केंद्र की सहायता से मशरूम व अन्य उत्पादों के लिए प्रदेश में कार्गो सुविधा शुरू करने के लिए एयर इंडिया के अधिकारियों के साथ बैठक भी करेगी।उत्तराखंड से प्रदेश में निर्यात को बढ़ावा देने के लिए बुधवार को सचिवालय में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह और केंद्रीय वाणिज्य सचिव अनूप वधावन के बीच विचार विमर्श हुआ। इस दौरान बताया गया कि प्रदेश से प्रतिवर्ष सात हजार करोड़ रुपये की वस्तुओं का निर्यात होता है। यह कुल निर्यात दर का 0.5 प्रतिशत है। मुख्य सचिव ने प्रदेश की निर्यात दर को दोगुना करने के लिए लॉजिस्टिक कॉस्ट को घटाने के लिए केंद्र से सहायता करने का अनुरोध किया।

उन्होंने प्रदेश में उत्पादित होने वाले मशरूम और अन्य कृषि उत्पादों के लिए कार्गो सुविधा उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी रखा। इस पर सचिव वाणिज्य ने एयर इंडिया तथा राज्य के अधिकारियों के साथ शीघ्र बैठक आयोजित करने की बात कही। इस दौरान मुख्य सचिव ने कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए पंतनगर यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर को फोन पर वार्ता कर प्रमाणीकरण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने बताया कि प्रदेश में इस समय निर्यात नीति बनाने पर काम चल रहा है।

इसके जरिये निर्यातकों को छूट देने के साथ ही अन्य सुविधाओं का भी प्रावधान किया जाएगा। इस नीति को जल्द ही कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा। मुख्य सचिव ने केंद्र सरकार से ट्रेड इंफ्रास्ट्रक्चर फॉर एक्सपोर्ट स्कीम (टाइस) के अंतर्गत एक्सपोर्ट से जुड़े अवस्थापना विकास के लिए प्रदेश की प्रस्तावित योजना में भी सहयोग की अपेक्षा की। बैठक में संयुक्त सचिव वाणिज्य केशव चंद्र के अलावा सचिव आरके सुधांशु, डी सेंथिल पांडियन, आर मीनाक्षी सुंदरम व निदेशक उद्योग सुधीर नौटियाल आदि भी उपस्थित थे। 

निर्यातकों के साथ किया संवाद इससे पहले सचिव वाणिज्य अनूप वधावन ने उत्तराखंड की निर्यात नीति के संबंध में हुई परिचर्चा में भी शिरकत की। इस दौरान राज्य की निर्यात रणनीति बनाने पर विचार विमर्श किया गया। परिचर्चा में निर्यातकों की सुविधा के लिए सिंगल विंडो सिस्टम बनाने पर भी जोर दिया गया।

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